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हिन्दी कविता का अन्तर्जाल युग और ओबीओ लाइव महाइवेंट - १

हिन्दी कविता एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। इस युग में हिन्दी कविता वैश्विक मंच पर अन्तर्जाल के माध्यम से अपनी पहचान बना रही है । इसलिए इस युग को “अन्तर्जाल युग” ही कहा जाय तो ठीक रहेगा। आज के समय में अन्तर्जाल का प्रयोग करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इसमें हिन्दीभाषी लोगों की संख्या भी कम नहीं है। धीरे धीरे ही सही अन्तर्जाल के माध्यम से हिन्दी कविता विश्व के कोने कोने तक पहुँच रही है। आज अधिकांश हिन्दी कविताएँ अन्तर्जाल पर उपलब्ध हैं। अब उभरते हुए कवियों को प्रकाशित होने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता। बस अपना एक ब्लॉग बनाया और स्वप्रकाशन शुरू। अन्तर्जाल पर विभिन्न जालस्थलों के माध्यम से स्थापित एवं उदीयमान कवियों को विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं अन्तर्जालीय कवि सम्मेलन तथा मुशायरों में आमंत्रित किया जाता है। इन आयोजनों में प्रतिभागी अपनी रचनाएँ जालस्थलों पर चिपकाते हैं एवं एक दूसरे रचनाकारों की रचनाओं पर टिप्पणियाँ करके उनका उत्साहवर्धन भी करते हैं। जो कविता के जानकार हैं वो उदीयमान कवियों की त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाते हैं और सुधार के तरीके भी बताते हैं। इस तरह अन्तर्जाल के माध्यम से हिन्दी कविता दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कर रही है।

एक ऐसा ही आयोजन ओबीओ लाइव महाइवेंट – १ के नाम से दिनांक ०१-११-२०१० से १०-११-२०१० तक ओपेन बुक्स आनलाइन नामक जालस्थल पर किया गया । इस आयोजन में दीपावली को लक्ष्य करके रचनाएँ लिखनी थीं। यह संभवतः अन्तर्जाल पर अब तक किये गये किसी भी आयोजन में सबसे बड़ा था। इसका अन्दाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसमें १२०० से ज्यादा टिप्पणियाँ आईं जिसमें –४० से अधिक कवियों की २०० से अधिक रचनाएँ शामिल हैं। इस आयोजन में रचनाकारों ने विभिन्न प्रकार के छन्दों का प्रयोग किया जिनमें गीत, ग़ज़ल, नवगीत, दोहा, कुण्डलिया, हाइकु इत्यादि हैं। छन्द मुक्त कविताओं की भी कोई कमी नहीं थी। कई सारे ऐसे छन्द भी प्रयोग किए गये जो अब लुप्तप्राय हो चले हैं अर्थात इन छन्दों में अब शायद ही कोई रचनाकार लिखता है। इस आयोजन के सूत्रधार थे माननीय नवीन सी चतुर्वेदी जी, जो स्वयं एक कवि हैं और अन्तर्जाल पर एक जाना माना नाम हैं। यह आयोजन अन्तर्जाल पर हिन्दी कविता के विकास में एक मील का पत्थर है। हिन्दी कविता के “अन्तर्जाल युग” के इतिहास में इस आयोजन का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा ऐसा मेरा विश्वास है।
इस आयोजन को आप निम्नांकित कड़ी के माध्यम से पढ़ सकते हैं।
http://www.openbooksonline.com/forum/topics/obo-1

धर्मेन्द्र कुमार सिंह

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on November 15, 2010 at 1:54pm
धर्मेन्द्र जी आपने वास्तविकता का रेखांकन किया है | पूर्व में मंच की कमी महसूस होती थी ओ.बी. ओ. ने वह पूरी कर दी | यहाँ लिख-पढ़कर संतोष मिलता है | नवीन जी ,योगराज जी ,बागी जी ,सलिल जी जैसे कुछ लोग ओ.बी.ओ. की रीढ़ हैं |शुभकामनाएं |

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Comment by Rana Pratap Singh on November 14, 2010 at 8:10am
धर्मेन्द्र भैया सादर प्रणाम
सर्वप्रथम तो महाइवेंट की जोरदार सफलता के लिया सभी को बधाई और नवीन भैया को स्पेशल बधाई| बस इतना ही कहूँगा
अभी तो ये अंगड़ाई है.......
Comment by आशीष यादव on November 12, 2010 at 2:31pm
maine bhi pahli baar itna bada kawi sammelan dekha. yaha par maine bhi bahut kuchh sikha. ek nayi aur bahut achchhi widha mujhe haiku lagi, jise mai pahli baar yahi padha aur samjha. ab kabhi kabhi likhne ka bhi prayatn kar leta hu.

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