For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

(१) ज्वलंत प्रश्न

जब फलदार वृक्ष ही
बन जाएं नरभक्षी,
चूसने लगें रक्त,
तब क्या करे पथिक,
किधर ढूँढे छाँव, शीतलता,
कहाँ करे विश्राम,
कैसे जुटाये भोजन
जेठ की तपती राहों में।

(२) एक घटना

सुबह कुछ फूल देखे थे,
आकार में बड़े-बड़े,
चटख रंगोंवाले, भड़कदार,
मन किया कि घर ले आऊँ,
जाँच की तो पाया
सारे के सारे जहरीले थे।

(३) कैसी बारिश

सुना है कल बारिश हुई थी,
खूब गरज-गरजकर,
लेकिन
चौराहे पर का ठूँठ तो
वैसे का वैसा ही
सूखा, उदास खड़ा है।

(४) खूबसूरत

धुँधलके में बड़ा
खूबसूरत दिखता था वो,
लेकिन
उजाले में देखा तो जाना,
उसका चेहरा भी
दागदार था।

(५) शांति

शांति मेरे पास थी,
थोड़ी सी ही सही
मगर थी,
लेकिन मैं लालची
जरा सी और ढूँढने लगा,
इसी चक्कर में
वो भी कहीं गिर गयी।

Views: 509

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on March 12, 2013 at 12:15pm

बहुत-बहुत आभार आदरणीय राम शिरोमणि पाठक जी.....

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on March 12, 2013 at 12:13pm

आपका हार्दिक आभारी हूँ आदरणीय संजय मिश्रा सर......

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on March 12, 2013 at 12:13pm

आदरणीय गुरुदेव, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद....इन क्षणिकाओं को रचते समय जो मन में भाव आ रहे थे उन्हें हूबहू लिख दिया है....

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on March 12, 2013 at 12:06pm

बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय केवल प्रसाद जी...

Comment by ram shiromani pathak on March 11, 2013 at 8:53pm

सुन्दर क्षणिकाएं भाई कुमार गौरव जी... हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on March 11, 2013 at 3:42pm

सुन्दर क्षणिकाएं भाई कुमार गौरव जी... हार्दिक बधाई स्वीकारें.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 11, 2013 at 2:40pm

भाई अजीतन्दु जी, बहुत ही सघन प्रयास हुआ है. क्षणिकाओं की सुन्दरता विचार और भाषागत कसावट होती है. तनिक सा शाब्दिक विस्तार पाठक के मस्तिष्क की गणन और गुनन प्रक्रिया को बाधित करती है. यही कारण है कि कई पाठक समान्यतया क्षणिकाओं को दुरुह भी मानते हैं.  लकिन जो है सो यही है.. !  ..  :-)

आपकी प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 10, 2013 at 12:44pm

कुमार गौरव जी सुप्रभात! आपकी क्षणिकाएँ बहुत-बहुत प्यारी हैं! थोड़ी उदास सी लेकिन परिवेश के अनुसार बहुत अच्छी है!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"भूल जाता हूँ ये अक्सर कि उसे भूलना है अब किसी बात का भी होश किधर है साईं। इस पर एक उदाहरण देखें भूल…"
35 minutes ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"  राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
55 minutes ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
1 hour ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आरंभ से गिरह तक सभी शेर बहुत अच्छे हुए। उर्दू के दृष्टिकोण से 9वें शेर में 'बहर' तथा 10…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गिरह के साथ गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"शह्र में झूठ का कुछ ऐसा असर है साईं अब तलक सच की नहीं ख़ैर ख़बर है साईं याद है या कोई रूहानी असर है…"
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"    राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
10 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोख से मौत तलक रात अमर है साईंअपने हिस्से में भला कौन सहर है साईं।१।*धूप ही धूप मिली जब से सफर है…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सादर अभिवादन।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"स्वागतम"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  प्रस्तुत नवगीत को आपसे मिला उत्साहवर्द्धन हमें प्रयासरत रखेगा, आदरणीय अशोक…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service