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बलिया मे छठ पूजा, बागी की नजर से ....

सर्व शक्तिमान एवं प्रत्यक्ष भगवान सूर्य के उपासना का पर्व छठ पिछले दिनों उत्तर भारत सहित पूरे भारत मे काफी श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया, बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले मे भी छठ का पवित्र त्यौहार धूम धाम से मनाया गया |
इस त्यौहार की खास बात यह है कि छठ पूजा मे प्रथम अर्ध्य डूबते हुये सूर्य को दिया जाता है तथा दूसरा अर्ध्य उगते हुये सूर्य का किया जाता है, यह परंपरा एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत कि " उगते सूर्य को सभी सलाम करते है तथा डूबते सूर्य को कोई सलाम नहीं करता" को झुठलाती है, साथ ही एक सन्देश भी मिलता है कि हमे अपने बुजुर्गो का ख्याल अपने नवजात से पहले करना चाहिये |

एक छोटी सी भोजपुरी कविता मैने छठ पूजा पर विशेष लिखा था वह आपके आशीर्वाद हेतु नीचे लिख रहा हूँ ...

सगरे जॅहा मे जवन कही ना होला,
होला ऊ, यू.पी.आऊर बिहार मे ,
डूबत सूरुज के पूजा होला,
छठी के त्योहार मे I

छठ के परसाद घर घर बाँटे के,
चलन बा हमनी के परिवार मे,
सगरे जॅहा मे जवन कही ना होला,
होला ऊ, यू.पी.आऊर बिहार मे I

डूबत सूरुज के पूजा कईला के,
संदेश जाला सारा संसार मे ,
बॅड बुजुर्ग के आदर कईल ,
शामिल बा,हमनी के संस्कार मे,

सगरे जॅहा मे जवन कही ना होला,
होला ऊ, यू.पी.आऊर बिहार मे,
डूबत सूरुज के पूजा होला,
छठी के त्योहार मे I
( हलाकि अब तो यह त्यौहार पूरे भारत मे मनाया जाने लगा है )

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 24, 2011 at 12:12pm
धन्यवाद आदरणीया विमला जी |
Comment by vimla bhandari on May 24, 2011 at 11:19am
काफी मेहनत से सजाया और परोसा है आपने
Comment by Anand kumar Ojha on May 6, 2011 at 4:55pm
Bahut Sundar ullekh ..... Bagi jee ke dwara Chhad mata ke bare me ... Dhanyabad..

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 17, 2010 at 7:25pm
बहुत बहुत धन्यवाद, वीरेंद्र जैन जी, आपको रचना पसंद आई, प्रयास सार्थक हुआ |
Comment by Veerendra Jain on November 17, 2010 at 12:04pm
Ganesh ji..bahut hi sunder rachna...pura drishya saamne ubhar aaya...bahut bahut badhai...

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 17, 2010 at 9:41am
धन्यवाद भाई आशीष | आपने भी बहुत सुंदर चित्र लगाया है |

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 17, 2010 at 9:40am
विवेक भाई, छठ माई रउरा पर आपन कृपा बनवले रहस | रउरा के रचना आ चित्र पसंद आइल, हमर मेहनत सार्थक भइल |
Comment by आशीष यादव on November 17, 2010 at 7:16am
मेरे यहाँ महाहर धाम पर भी छठ पूजा का भव्य दृश्य होता है| एक बड़ा तलब है जहा श्रवन कुमार को तीर लगी थी| वही पर उस क्षेत्र के लोग आते है उस दिन, और तालाब के तीन ओर तो बिलकुल जगह भी नहीं बचती| बहुत अच्छा लगता है|

Comment by आशीष यादव on November 17, 2010 at 7:12am
बागी जी सही में हमनी के छठ पूजा के मजा कुछ और ही होला|
आप के गीत आ फोटो दुनो हमके पसंद आइल|
Comment by विवेक मिश्र on November 16, 2010 at 11:52pm
गणेश भाई..!! बहुत नीक लागल राउर 'छठी के गीत' आ फोटो देख के त आपन घर के याद आ गईल. हमरा के परसदिया न मिली..?

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