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ओ बी ओ तृतीय वर्षगाँठ को समर्पित : 'मत्तगयन्द' सवैया

'मत्तगयन्द' सवैया : 7 भगण व अंत में दो दीर्घ

जात न पात न भेद न भाव न रूप न रंग न डोर दिवारें.
एक धरा यह प्रेम भरी जँह प्रेम लिए हम आप पधारें,
सीख सिखाय रहे सबहीं यँह ज्ञान भरें अरु लेख निखारें,
देश विदेश मिलाय दिए जन मेल मिलाप यहाँ करि डारें.

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Comment by अरुन 'अनन्त' on April 3, 2013 at 2:24pm

अनेक अनेक धन्यवाद राजेश भाई, बिलकुल सही यहाँ ज्ञान का भण्डार है जो रह गया झोली भर गया. सादर

Comment by राजेश 'मृदु' on April 3, 2013 at 1:20pm

वाह बढि़या मत्‍तगयंद और सत्‍य ही आपने कहा कि ओबीओ सबको मिला रही है । हम तो बहुत मनचले हैं पांव टिकते ही नहीं पर ओबीओ ने ऐसा पकड़ा कि ओबीओ छोड़ दे हम ना छोड़े

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 3, 2013 at 12:17pm

आदरणीय लक्ष्मण सर जी बड़ों का आशीष सदैव लाभकारी होता है और उज्जवल भविष्य की ओर ले जाता है, आशीष यूँ ही बनाये रखें. सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 3, 2013 at 12:15pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी सवैया आपको पसंद आये, जानकार कर ख़ुशी हुई हार्दिक आभार.

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 3, 2013 at 12:03pm

आदरणीय गुरुदेव श्री सौरभ सर जी आपकी सराहना एवं अनमोल टिपण्णी पाकर ह्रदय गद गद हो गया, आपका प्रतिउत्तर सदैव सकारात्मक दिशा प्रदान करता है. कुछ समय के लिए कार्य में अधिक व्यस्तता कारण ओ बी ओ परिवार यानी कि अपने परिवार से दूर रहा परन्तु अब कोशिश रहेगी की सक्रियता बनी रहे. आशीष एवं स्नेह ही बनाये रखें. सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 3, 2013 at 12:00pm

आदरणीय श्री अशोक कुमार रक्त्ताले सर आपकी सराहना मिली मेरा लेखन का कार्य सफल हुआ, स्नेह यूँ ही बनाये रखें. सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 3, 2013 at 11:58am

आदरणीय श्री राम जी एवं आदरेया शिखा कौशिक जी आप दोनों का हार्दिक आभार

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 2, 2013 at 7:00pm

सुन्दर मत्त्गंद सवैया के माध्यम से ओबीओ के प्रति शुभ कामनाओं की लिए आभार, और बधाई सभी सदस्यों को हार्दिक 

शुभ कामनाए 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 2, 2013 at 6:45pm

आदरणीय, अरूण शर्मा‘अनन्त‘ जी, आप सभी को वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बहुत बहुत बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 2, 2013 at 4:41pm

हम तो मंच मात्र समझते थे, आपने तो ओबीओ को एक अलग धरा ही गिन लिया, भाई !

लोग सही कहते हैं, कवि वो बोल लेता है जो सामान्य जन सोच तक नहीं पाते. .. :-)))

सवैया के सधे होने की बधाई, अरुन भाई.

सही कहा आपने, अरुनभाई, ओबीओ को मात्र सुनाने का स्थान न जान कर सुनने और अध्ययन का स्थान भी जानें तो हममें से कई परिपक्व रचनाकार हो जायँ. लेकिन टेक तो यहीं है.

आपको भी ओबीओ के प्रादुर्भाव दिवस की अनेकानेक बधाइयाँ.

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