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इस जीवन में लगा रहेगा ,
दुःख-सुख हार जीत!
दृढ़ता से बढ़ते रहो ,
गाओ विजय का गीत !!

अविराम बढ़ते चलो ,
भर लो अन्दर शक्ति भरपूर !
यदि इच्छा शक्ति प्रबल होगी ,
नहीं लगेगी मंजिल दूर !!

विकारों का परित्याग कर ,
सद्गुणों को अन्दर भर !
कितना खोया कितना पाया ,
बंद कर अतीत का घर !!

एक दिन ऐसा आएगा ,
स्वयं रास्ता तुम्हे रास्ता बताएगा ,
तुम एक कदम चलोगे ,
वो कदम चला आएगा !!

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 12, 2013 at 12:31am

आज आपकी रचना देख पा रहा हूँ. सीखने के क्रम में ऐसी रचनाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. यह अवश्य है कि कोई रचनाकर्म अभ्यास का ही मुखर प्रारूप हुआ करता है. लेकिन यह भी ध्यातव्य है कि रचना पर हुआ कोई अभ्यास किसी सम्मेलन के मंच से पढ़ने की चीज नहीं हुआ करते जबतक कि उन प्रयासों में अभिनवपन न हो.

क्या ही अच्छा होता यदि इस तरह की किसी रचना को पंचचामर छंद में बांधा गया होता.

शुभेच्छाएँ.

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 12:13pm

आदरणीया कुन्ती  जी  हार्दिक आभार !

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 12:12pm

 आदरणीया वन्दना जी  हार्दिक आभार !

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 12:11pm

 आदरणीया सीमा मैम हार्दिक आभार !!

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 12:10pm

आदरणीय जवाहरलाल जी हार्दिक आभार  !!!!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 5, 2013 at 7:43am

आदरणीय श्री शिरोमणि जी, भाव अच्छे हैं, सकारात्मक सोच रखनी ही चाहिए! 

Comment by Vindu Babu on April 4, 2013 at 10:48pm
बहुत अच्छी उत्साह वर्धक रचना!
रचना मे प्रस्तुत जज्बा वन्दनीय है आदरणीय रामशिरोमणि जी ।
Comment by seema agrawal on April 4, 2013 at 7:37pm

बहुत अच्छे भाव ......रचना के शिल्प पर थोड़ा समय और प्रयास दिया जाना चाहिए ...शुभकामनाएं 

Comment by coontee mukerji on April 4, 2013 at 6:09pm

रामजी आपके भाव बहुत सुंदर है .बागी जी की बातों पर ध्यान  दीजिए.आप बहुत उन्नति करेंगे.धन्यवाद


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 4, 2013 at 11:59am

प्रिय राम शिरोमणि जी, शर्मिंदा की कोई बात नहीं, गलती तभी होती है जब आप कुछ करते हैं । ऐसी गलतियाँ शुभ लक्षण है :-) 

कृपया ध्यान दे...

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