For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मौ  मौलिक व अप्रकाशित

Views: 690

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 14, 2013 at 7:42am

अपनी-अपनी सी कविता है.  बधाई आदरणीया विजयाश्री जी

Comment by vijayashree on April 9, 2013 at 2:54pm

आभार .........डॉ प्राची

         ...........सावित्री राठौर जी

Comment by Savitri Rathore on April 7, 2013 at 12:09am

बड़े सहज-सरल शब्दों में आपने नारी-जीवन की विषम परिस्थितियों का चित्रण किया है,साथ ही एक माँ की पीड़ा को भी स्वर प्रदान किया है।विजयाश्री जी इस मर्मभेदी रचना हेतु आप प्रशंसा की पात्रा हैं।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 5, 2013 at 7:02pm

माँ के बुलावे में एक अलग ही कशिश होती है, जिसे बेटी का ह्रदय शायद न समझ पाए पर एक माँ का ह्रदय बखूबी समझता है...

सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया विजयश्री जी 

Comment by vijayashree on April 5, 2013 at 4:56pm

मीना पाठकजी शुक्रिया ....मेरी आँखें भी भर आई थी लिखते -लिखते

Comment by vijayashree on April 5, 2013 at 4:54pm

अरुण शर्मा 'अनन्त' जी रचना संज्ञान के लिए शुक्रिया . माँ की याद आना स्वाभाविक है ...माँ का साथ और आशीर्वाद ()तो हमेशा बच्चों के साथ होता है ....वो पास हो या दूर

Comment by Meena Pathak on April 5, 2013 at 4:44pm

आंखें भीग गईं आप की रचना पढ़ कर ... बहुत बहुत बधाई इस मार्मिक रचना के लिए 

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 5, 2013 at 4:31pm

आदरेया सादर प्रणाम इस प्रस्तुति पर आपको ढेरों बधाई और कुछ कहूँगा नहीं क्षमता नहीं है कुछ भी कहने की जब भी माँ की बात आती है माँ की बहुत याद आती है, सोंचने समझे कहने की क्षमता ख़तम हो जाती है मस्तिष्क शुन्य हो जाता है.

Comment by vijayashree on April 5, 2013 at 4:14pm

Ashok Kumar Raktale जी , ram shiromani pathak जी ,vijay nikore जी , Laxman Prasad Ladiwala जी , Kewal Prasad जी , SANDEEP KUMAR PATEL जी .....रचना संज्ञान और के लिए शुक्रिया .

 

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 5, 2013 at 1:04pm

आदरणीया बहुत सुन्दर मार्मिक रचना, हम कहते हैं बेटियों को पराया न कहो मगर तब यही बातें बेटी को पराया बना देती हैं. फिर माँ तो कह कर बुला भी लेती है. पिता शायद कह भी नहीं पाते.बधाई स्वीकारें.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
2 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
13 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
20 hours ago
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Mar 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Mar 13
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Mar 13

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service