For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दर्द में आपने कमी कर दी
अपनी यादें जो अजनबी कर दी ।
 
 
आँख भर इश्क का समंदर था
रूठकर कैसी तिश्नगी कर दी ।
 
 
मामला घर में ही सुलझ जाता
बात छोटी सी थी, बड़ी कर दी ।
 
 
फैसला जब दिया तो मक़्तल में
जान आफ़त में थी, बरी कर दी ।
 
 
और क्या देंगे मुफलिसी में तुम्हें
नाम तेरे ये जिंदगी कर दी ।

Views: 976

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by वेदिका on July 1, 2013 at 9:56pm

क्या बात है स्नेही आशीष जी! 

बेहतरीन और संजीदा गजल पे बहुत सारी बधाई!  

और क्या देंगे मुफलिसी में तुम्हें

नाम तेरे ये जिंदगी कर दी ।

आखिरी शेअर ने तो कमाल की छाप छोड़ी है !!

Comment by Sushant Jain 'Ankur' on July 1, 2013 at 9:30pm

Aye haye .. Akhiri sher .. bahut hi khoob.

 

~ Sushant Jain 'Ankur'

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 18, 2013 at 10:44pm

आदरणीय Saurabh Pandey सर, आपका हर लफ़्ज हौसला-अफजाई करता है ।
तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ ।  :)


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 17, 2013 at 12:20am

भाई आशीषजी, आपने वाकई कमाल किया है. मतले ने जिस आसानी से असीम को ससीम किया है वह आपकी रचनाधर्मिता को स्वर दे रहा है.

इसी तरह मामला घर में ही  वाला शेर बन पड़ा है. लेकिन कमाल किया है आखिरी शेर ने.

बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएँ.

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 10, 2013 at 10:38pm
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 10, 2013 at 8:49am

सुन्दर गजल आदरणीय आशीष जी. बधाई कुबुलें.

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 9, 2013 at 8:31pm

विवेक मिश्र जी,

बृजेश कुमार सिंह (बृजेश नीरज) जी,

Tilak Raj Kapoor जी

Rajesh Kumar Jha जी

ग़ज़ल पसंद करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत आभार ।

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 9, 2013 at 7:46pm

सरल शब्दों में बड़ी बात! बधाई आ० आशीष जी..!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 9, 2013 at 7:44pm
Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 9, 2013 at 7:40pm

बहुत-बहुत शुक्रिया विजय मिश्र जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"   आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर आपने सुन्दर…"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई * बन्द शटर हैं  खुला न ताला।। दृश्य सुबह का दिखे निराला।।   रूप  मनोहर …"
10 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न…"
15 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद +++++++++ करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥ कटे फटे सब को सीता है। सदा…"
15 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin posted discussions
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Feb 15
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Feb 15
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Feb 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Feb 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service