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दोहे (सन्दर्भ -पाक में सर्वजीत की ह्त्या)

 

सरबजीत शहीद हुए, सत्ता करे न काम   

छोड़ गया दो बेटियाँ, जो देगी अंजाम |

 

याद करो इतिहास को, और इंदिरा नाम,

पाकिस्तान हार गया,  नाम हुआ बदनाम |

 

हर देवी दुर्गा यहाँ, रानी झाँसी नाम,

दुश्मन थर-थर कांपते, होती नींद हराम |

 

सत्ता बेरी हो गयी, घटे देश की आन,

सत्ता उसको दीजिये, बढे देश की शान |

 

सावधान सेना करे, सत्ता दे ना ध्यान,

जन की रक्षा कर सके, देना उसे कमान |

 

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 8, 2013 at 7:22pm

 दोहे पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार डॉ दिलीप मित्तल जी 

Comment by Dr Dilip Mittal on May 8, 2013 at 6:04pm

आदरणीय सुंदर दोहे के लिए बधाई ,

सरबजीत की शान में ४ लाइन ,

सरबजीत ने देश कि  लाज रख ली ,

उसके दिल ,गुर्दे थे तो निकाल लिये ,

अगर किसी नेता के टटोलते तो ,

देश को शर्मसार होना पड़ता ,

न दिल, जिगर  ना खोजने पर दिमाग,

का कही पता चलता .

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 5, 2013 at 5:46pm

पुनः आभार श्री मनोज शुक्ला जी 

Comment by manoj shukla on May 5, 2013 at 4:14pm
आदर्णीय श्री लक्षमण जी आपको रचना के लिए पुनः बधाई.....
आदर्णीय सीमा जी आपका सादर आभार क्योकि आपके सुझाव से मैने भी सीखा है.....प्रायः मुझसे भी ऐसी गलतियाँ हुई है
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 5, 2013 at 3:16pm

बिलकुल सही कहा है आपने इतने दोहे रचने के अब आंतिक विन्यास पर समझा पाया है कोई | दोहे सराहने के लिए आपका हार्दिक 

आभार भाई श्री अशोक रकाले जी 

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 5, 2013 at 3:02pm

आदरणीय लड़ीवाला साहब बहुत सुन्दर दोहे है.बहुत सुन्दर भाव बहुत बहुत बधाई स्वीकारें. आदरेया सीमा जी  के दिए सुझाव गाँठ में बाँध लें.दोहे के आतंरिक विन्यास को इतनी सुन्दरता से परिभाषित करते कम ही देखा है.सादर.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 5, 2013 at 1:05pm

शहीद की जगह 2 मात्रिक शब्द दिमाग में नहीं बैठ रहा है | इस दोहे को अगर यूँ लिखा जावे तो कैसा रहे कृपया बतावे-

सरबजीत की जीत है, पर सत्ता नाकाम 

छोइ गए दो बेटियाँ, जो देगी अंजाम । 

सुझाव हेतु पुनः हार्दिक आभार आदरनीया सीमा अग्रवाल जी 

Comment by seema agrawal on May 5, 2013 at 11:59am

खुशी हुयी लक्षमण जी आपने बात को देखा समझा और परखा आपके द्वारा संशोधित दोहों को राजेश जी ने सही समय पर उपस्थित हो कर स्वीकृति दे दी है 

सरबजीत शहीद हुए, सत्ता करे न काम   

छोड़ गया दो बेटियाँ, जो देगी अंजाम |.....एक बार इस दोहे को भी परखिये 3+3+2+3+2 

सरब=३+जीत =३+ शही =३ ..............बस यही ये दोहा गलत हो गया तीसरे स्थान पर कोई 2 मात्रिक शब्द आना चाहिए था  

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 5, 2013 at 11:33am

ओबीओ मंच पर टिप्पणियों के माध्यम से सभी को सिखने/सिखाने को मिलता है, भाई श्री बृजेश सिंह नीरज जी 

दोहे पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार 

Comment by बृजेश नीरज on May 5, 2013 at 7:08am

आदरणीय बहुत सुन्दर और सामयिक दोहे। बधाई! आपके माध्यम से मुझे भी एक नई चीज सीखने को मिली।

कृपया ध्यान दे...

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