घर लौटकर पूत विदेश से
माँ से बोला बड़े प्यार से,
आया मै तुमको लेने माँ
यहाँ अकेली अब न रहना |
इस घर को अब बेच चलेंगे
खाली घर में भूत बसे माँ,
संग में मेरे अब तू रहना
उम्र नहीं यह तन्हा रहना |
उमडा उसपर माँ का प्यार,
बेच दिया सारा घरबार,
पोर्ट पर जाकर माँ से बोला-
माँ तू यहाँ पर बैठे रहना |
माँ बोली क्या बात है बेटा
पूत कहे कुछ बात नहीं है,
सामान की है जांच कराना,
माँ बोली जा, जल्दी आना |
रात बिताई बैठे बैठे,
हुई भौर चिंता में डूबी,
सफाई कर्मी से माँ यूँ बोली,
मै इंतज़ार कर रही बेटे का |
कितनी जांच अभी बाकी है-
उसके साथ विदेश में जाना,
सफाई कर्मी धीरे से बोला-
पूत तुम्हारा चलागया है,
तुमको यही वह छोड़ गया है|
आहे भर कर माँ यूँ बोली-
मेरे बेटे तुम खुश रहना.
माँ को आता सब कुछ सहना,
मेरा दुःख मुझको ही सहना|
सफाईकर्मी से वह बोली -
यह बात किसी से ना कहना,
और भी बेटे यहाँ बहुत है
उनको होगी मुश्किल सहना,
माँ को आता सब कुछ सहना|
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
Comment
धैर्यता, सहनशीलता, दया और ममता भाव ही तो भारतीय नारी की पहचान है भाई श्री सतवीर वर्मा जी
रचना पसंद करने के आपका हार्दिक आभार
उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार श्री विजय निकोरे जी
आदरणीय लक्ष्मण जी,
इस मार्मिक रचना के लिए बधाई।
सादर,
विजय निकोर
भाई श्री संदीप जी, इस घटना को अखबार में पढ़कर मेरे भी दिल के तार झनझना उठे थे, और इसे सबके सामने प्रस्तुत
करने की इच्छा हुई | हार्दिक आभार स्वीकारे श्री संदीप पटेल भाई
रचना पसंद करने के लिए हार्दिक आभार आपका भाई श्री प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी
आपको रचना केभाव मार्मिक लगे एवं दिल को छू गयी, मेरा प्रयास सार्थक हो गया, बहुत बहुत आभार आपका
श्री केवल प्रसाद जी
हार्दिक आभार अपका श्री श्याम नारायण वर्मा जी
आदरणीय सर जी संवेदना से भारी इस रचना ने दिल के तार छेड़ दिए
सादर बधाई हो
आहे भर कर माँ यूँ बोली-
मेरे बेटे तुम खुश रहना.
माँ को आता सब कुछ सहना,
मेरा दुःख मुझको ही सहना|
सफाईकर्मी से वह बोली -
यह बात किसी से ना कहना,
माँ का दिल .वाह
आदरणीय लड़ीवाला जी
मार्मिक
सादर बधाई
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