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दुनिया की सबसे प्यारी माँ के लिए

माँ

मुझे वो दिन याद है 
जब तू मुझे गोदी में लेकर,
बैठी रहती थी रात रात भर,
कि मुझे नींद आ जाए|
पर तू सारी रात जागकर 
सूरज उगने से पहले 
लग जाती थी घर संवारने में|
मुझे वो दिन याद हैं 
जब तू मेरे स्कूल से वापिस आने तक 
नहीं खाती थी खाना 
मुझे खिलाने से पहले|
फिर जो मैं नहीं खाती थी,
वही खा लेती थी   
तू ख़ुशी से|
मुझे वो दिन याद है 
जब मुझे अकेले छोड़ कर
कहीं भी बाहर 
नहीं जाती थी कभी|
अपनी चिंता किये बिना
मेरा साथ देती थी 
तू सदा|   
मेरे जीवन का हर एक पल
सजीला है तेरी ममता से
कभी अहसान नहीं जताया
सीख मिली तेरी नम्रता से|
मैं भी तेरे जैसी बन सकुं 
यही एक आस है, अहसास है  
कि तू मेरे पास है|
अब तेरे वही मजबूत हाथ
कांपते हैं उम्र से 
पर मेरे सर पर आज भी
तेरा आशीष है|
मेरे हाथ सदा पकड़े रखना 
सही रास्ता दिखाने की 
तुमसे अरदास है|
तुम्हारे चेहरे की ये झुर्रियां
दिखाती हैं तुम्हारा वही सौन्दर्य 
जिससे मिला मुझे तेरा रूप 
अच्छा या बुरा, पर सर्वोत्तम|
अब भी तुम पर आश्रित हूँ
तुम्हारी जिंदगी के 
अनुभव की दरकार है|
दुनिया की सबसे प्यारी माँ के लिए
मौलिक एवं अप्रकाशित 
उषा तनेजा 

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Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on May 8, 2013 at 2:10pm

आदरणीया उषा जी सादर, माँ के प्रति भावमयी अभिवयक्ति के लिए सादर बधाई.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 8, 2013 at 5:11am

श्रद्धापूरित शब्दों से कृतज्ञता ज्ञापन के क्रम में एक भावमय रचना केलिए बधाई. ..

Comment by manoj shukla on May 7, 2013 at 10:59pm
बहुत सुन्दर प्रस्तुति.... आदर्णीया..... बधाई स्वीकार करें
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 7, 2013 at 10:18pm

आ0 ऊषा जी,    ’कभी अहसान नहीं जताया, सीख मिली तेरी नम्रता से..!’ ....मां एक एहसास, एक आत्मा, खुशुबू, हवा, जल तरंग और मन की उमंग है!..! सहृदयानुभूति...।   बधाई स्वीकारें।  सादर,

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