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जागृत भारत को कर दूँ मुझमे पुरुषार्थ अपार भरो माँ
मन्त्र महार्णव मन्त्र महोदधि विस्मृत हैं यह ध्यान धरो माँ
छन्द जपे मम मानव तो तुम मन्त्र समान प्रभाव करो माँ
दिव्य अलौकिक बात कहूँ मम लेखन को इस भांति वरो माँ
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Views: 523

Comment

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Comment by Dr Ashutosh Vajpeyee on May 28, 2013 at 9:04am

बहुत आभार अशोक जी अब सुधार हो गया है.....पुनः अवलोकन करें 

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 24, 2013 at 8:40am

आदरणीय डॉ. आशुतोष वाजपेयी जी सादर वरदायी माँ को नमन करता  सुन्दर मत्तगयन्द छंद रचा है सादर बहुत बहुत बधाई स्वीकारें. एक जगह टंकन त्रुटी रह गयी है.सादर 

Comment by Dr Ashutosh Vajpeyee on May 23, 2013 at 8:41am

thanks you very much respected Arun Sharma ji & respected Laxman prasaad ji

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 22, 2013 at 10:54pm

वाह आदरणीय वाह बहुत ही सुन्दर सवैया हृदयस्पर्शी गहन भाव आपकी यह सुन्दर वंदना माँ शारदे पूर्ण करें. इस सुन्दर सवैया हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 22, 2013 at 5:47pm

प्रथम तो ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है डॉ आशुतोष वाजपेयी जी | भारत  को जागृत करने का भाव लिए

माँ से वंदना, बहुत सुन्दर है, हार्दिक बधाई स्वीकारे आदरणीय  

 

Comment by Dr Ashutosh Vajpeyee on May 21, 2013 at 6:02pm

बहुत बहुत आभार बृजेश जी और विजय जी 

Comment by बृजेश नीरज on May 21, 2013 at 2:35pm

बहुत ही सुन्दर आहवाहन! आदरणीय बधाई आपको!

Comment by विजय मिश्र on May 21, 2013 at 11:55am
"दिव्य अलौकिक बात कहूँ मम लेखन को इस भांति वरो माँ "

भगवती माता ने आपकी याचना सुन लियी है , साधना भी श्रेष्ठ है , इन दो कविताओं में राष्ट्र प्रेम की अद्भुत उद्वेलना है .आप सफल हैं भाई आशुतोषजी . प्रणाम और वंदन .

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