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हर रूप में हर रंग में

हर रूप में हर रंग में,

कभी दूर से कभी संग में

अकेले कमरा-बंद में ,

कभी भीड़ के हडकंप में

 

तपते आँगन में नंगे पाँव से,

कभी पीपल की ठंडी छांव से

हकीक़त कि कम्पित नाव से,

कभी सपनों के रेशमी गांव से

 

नदिया कि बहती धार पे,

कभी क्षितिज के उस पार पे

पेड़ों कि हिलती डार पे,

कभी वीणा कि झंकृत तार पे

 

दूर चाँद के मुस्कुराने पर,

कभी दिन में आंसू बहाने पर

फूलों के खिलखिलाने पर,

कभी उम्मीदें टूट जाने पर

 

डबडबाई आँखें छिपाते हुये,

कभी खुलकर ठहाके लगाते हुये

सँभलते-लड़खड़ाते हुये,

कभी रागिनी गुनगुनाते हुये

 

जीवन के झिलमिल कोणों को,

इस राह के अगणित मोड़ों को

लम्हों के सारे जोड़ों को,

हमने पल-पल देखा है||

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Comment

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Comment by Priyanka Tripathi on June 14, 2013 at 8:40am

 आदरणीय Jitendra Pastariya जी,

शुभकामनाओं हेतु बहुत-२ धन्यवाद |

साभार: प्रियंका  

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 9, 2013 at 7:55am
आदरणीया...प्रियंका जी, सुंदर पंक्तियों में पूर्ण तरीके से भावनाऐं प्रगट हो रही हैं."जीवन के झिलमिल कोणों को, इस राह के अगणित मोड़ों को लम्हों के सारे जोड़ों को, हमने पल पल देखा है ।।...बहुत खूबसूरती से आपने प्रस्तुत किया है, " शुभकामनाऐं स्वीकार कीजीऐ...
Comment by Priyanka Tripathi on June 9, 2013 at 2:46am

आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी,

आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणीं और बधाई हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद I

साभार:प्रियंका 

   

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 2, 2013 at 11:53pm

आदरणीया प्रियंका जी बहुत सुन्दर रचना है मुझे एक बहुत बड़े से मुक्तक के समान लग रही है. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by Priyanka Tripathi on May 31, 2013 at 7:22am

आ० Shijju S. जी, बहुत-बहुत धन्यवाद |
साभार प्रणाम  

Comment by Priyanka Tripathi on May 31, 2013 at 7:20am

आ०. Dr.Prachi Singh आपके प्रोत्साहन, परामर्श एवं शुभकामनाओं हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद | 
आपकी परामर्श को धारणा में लाने का यथासंभव प्रयास करुँगी...
सादर प्रणाम  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 28, 2013 at 4:58pm

प्रियंका जी अपनी भावनाओं को आपने खुबसूरती से शब्दों में उकेरा है, इस कविता के लिये आपको बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 28, 2013 at 11:56am

प्रिय प्रियंका जी 

आपके लेखन की सहजता प्रभावित करती है..

लेकिन अभी अभिव्यक्ति को शिल्प के सुगढ़ आधार की ज़रूरत है.. प्रयास कीजिये, आपके लेखन की संभावनाएं असीम हैं 

शुभकामनाएँ 

Comment by Priyanka Tripathi on May 27, 2013 at 11:20am

सभी मित्रों को साभार धन्यवाद :-)

Comment by बृजेश नीरज on May 27, 2013 at 10:54am

बहुत ही सुन्दर! आपको बधाई इस सुन्दर रचना पर!
सतत अध्ययन और लेखन आवश्यक है कलम की साधना और साधने हेतु।

कृपया ध्यान दे...

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