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सरस्वती वंदना- गीत //डॉ प्राची

////

हंसवाहिनी  वाग्देवी  शारदे  उद्धार  कर
अर्चना स्वीकार कर माँ, ज्ञान का विस्तार कर  

स्वप्न की साकारता संस्पर्श कर लें उंगलियाँ
ज्ञान की अमृत प्रभा द्रुमदल की खोले पँखुड़ियाँ
नवल सार्थक कल्पना में हौंसलों की धार कर
अर्चना स्वीकार कर माँ, ज्ञान का विस्तार कर

लेखनी हो सत्य शाश्वत उद्-गठित हो व्याकरण
ताल सुर लय भाव प्रांजल रस पगा हो अलंकरण
छान्दसिक या मुक्त हो उद्गार का शुभ-सार कर
अर्चना स्वीकार कर माँ, ज्ञान का विस्तार कर

तीव्र-कम्पन ही सृजन है औ' प्रलय संहार है
उद्भव तरंगित भाव-ध्वनि संचयन संस्कार है
अमृता माँ वीणापाणि वाणी में सुरधार कर
अर्चना स्वीकार कर माँ, ज्ञान का विस्तार कर

परिष्कृत अभिरुचि प्रदात्री ज्ञानचक्षु प्रकाशिनी
वेद ज्ञान प्रदायिनी अज्ञान तिमिर विनाशिनी
प्रगति बौद्धिक हो सुफल, आध्यात्म को आधार कर
अर्चना स्वीकार कर माँ, ज्ञान का विस्तार कर

सौम्यरूपा दे कृपा कर, सद्गुणों की ग्राह्यता
कर सकें मंगल सृजन, दे ज्ञान की सद्पात्रता
ब्राह्मी निज गात्र को सद्बुद्धि दे, शृंगार कर
अर्चना स्वीकार कर माँ, ज्ञान का विस्तार कर

*********************************

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 29, 2013 at 6:26pm

सौम्यरूपा वाग्देवी माँ शारदे की वंदना सुन्दर भाव शिल्प में रच कर प्रस्तुत करने पर हार्दिक बधाई |

माँ सरस्वारी की कृपा हम सब पर बनी रहे | वीणा-पाणी माँ शारदे की कृपा से ही सुन्दर रचना कर मानव

समाज के कल्याण के लिए कुछ योगदान करना संभव है | उसकी कृपा बगैर वेद ज्ञान प्राप्ति संभव नहीं |

पुनः बधाई स्वीकारे 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:49pm

प्रिय राम शिरोमणि पाठक जी 

माँ सरस्वती का आशीष हर शब्द साधक पर रहे यही मंगलकामनाएं है ..रचना पर आपकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:47pm

आ० वंदना तिवारी जी 

अभिव्यक्ति की सराहना कर उत्साहवर्धन करने के लिए हृदय से आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:46pm

आ० बसंत नेमा जी 

सरस्वती वन्दना पर आपके विनम्र अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:45pm

आदरणीय डॉ० आशुतोष वाजपेयी जी 

अभिव्यक्ति के शिल्प व गठन पर आपकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद 

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:43pm

आदरणीय पंकज त्रिवेदी जी 

वन्दना के मनोभावों को सराहने के लिए हार्दिक आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:37pm

आ० अभिनव अरुण जी 

//एक  सुगठित संमृद्ध सुसंस्कृत सरस्वती वंदना मुद्दत बाद पढ़ी है//

एक सजग पाठक के तौर पर यह रचना अपने कथ्य शिल्प से आपको संतृप कर सकी यह मेरे लेखन विश्वास के लिए बहुत उत्साहवर्धक है.

मुखर सराहना के लिए सादर धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:35pm

आ० तरुण कुमार जी

वन्दना के भावों को सराहने के लिए धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 29, 2013 at 5:34pm

आ० केवल प्रसाद जी 

सरस्वती वंदना पर आपकी शुभकामनाओं के लिए आभार.

Comment by ram shiromani pathak on May 29, 2013 at 3:49pm

आदरणीया प्राची जी बहुत ही सुन्दर वन्दना हुई है,मंत्र मुग्ध हो गया मै आपकी लेखनी को बार बार प्रणाम//

माँ सरस्वती की कृपा आप पर यु ही बनी रहे // //////हार्दिक बधाई

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