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सड़क  पर पड़ी
खाली बोतल
लोग आते- जाते
ठोकर मार जाते हैं .....
और इस तरह
यहाँ से वहाँ भटकती  ....
न जाने कहाँ से कहाँ
पहुँच जाती है
ये खाली बोतल
जो कभी
पानी से भरी होती थी ......
मगर आज खाली है
कल तक जो अपने
जरूरतमंद के पास होती थी
आज वो सड़क पर
पड़ी है .....
लावारिशो की तरह ......
बिलकुल ऐसी ही तो ...........
हाँ बिलकुल ऐसी ही तो
होती है हम इंसानों की जिन्दगी भी
एक सफल होकर असफल हुए
इंसान की जिन्दगी ......
इंसान जब सफल होता है
तो अपने चाहने वालो, जरुरतमंदो,
अपनों .........
सबके लिए अजीज होता है ....
सभी हर समय उसे अपने
पास रखना चाहते हैं .....
लेकिन जैसे ही वही इंसान
असफलता के घेरे में आता है
भुला दिया जाता है ....
लोग दूर-दूर , बहुत दूर
होने लगते हैं ....
अपने भी पराये करने लगते हैं
और एक दिन उसे भी
छोड़ दिया जाता है
अकेले….
सडको पर भटकने के लिए
अंधेरो में खोने के लिए  
बिलकुल पानी की
बोतल की तरह .......
जब तक पानी से भरी होती है
साथ रखी जाती है ...
जब खाली हो जाती है
तो फेंक दी जाती है
किसी सड़क पर या कूड़े के
ढेर में या फिर अगर
किस्मत अच्छी है बोतल की तो
स्टोर रूम में रख दी जाती है ......
शायद कभी भूले- भटके
किसी काम आ जाये ...........!!!!

स्वयं रचित व अप्रकाशित रचना

सोनम सैनी

Views: 599

Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on June 8, 2013 at 8:09pm

आदरणीया सोनम जी सादर, सुन्दर विषय पर सीधी सपाट बयानी. आप इतने दिनों से ओ बी ओ पर रचना कर रही हैं तब बिम्बों को सही उपयोग करने का आपको अवश्य ही प्रयास करना चाहिए. सादर.

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on June 1, 2013 at 9:49pm

एक खाली बोतल को बिम्ब बनाकर.........बहुत गहरा और गंभीर संदेश दिया......!!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 1, 2013 at 8:54am

भावनाओं को व्यवस्थित शब्द देने का प्रयास हो तो आपके संप्रेषण में सटीकपन तो आयेगा ही, रचनाकर्म सोद्येश्य हो जायेगा. 

इसी रचना में देखिये तो दुहराव है जो एक भावभरे तथ्य को हल्का कर देता है.

शुभेच्छाएँ.. .

Comment by coontee mukerji on May 31, 2013 at 12:54pm

बहुत सुंदर और सरस. रचना , मगर अपने भीतर कितने दर्द  छिपाए हुए ........./सादर  / कुंती .

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 31, 2013 at 11:13am

सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई 

Comment by ram shiromani pathak on May 30, 2013 at 4:39pm

भाव बहुत अच्छे है इसलिए हार्दिक बधाई ///लेकिन इसे गद्य कहूँ या पद्य////

Comment by Shyam Narain Verma on May 30, 2013 at 3:46pm
इस प्रस्तुति हेतु बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएँ.
Comment by aman kumar on May 30, 2013 at 3:07pm

अच्छी रचना के लिए बधाई |

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