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ग़ज़ल : जीतने तक उड़ान जिंदा रख

बहर : २१२२ १२१२ २२

----------------------------------

बाजुओं की थकान जिंदा रख

जीतने तक उड़ान जिंदा रख

 

आँधियाँ डर के लौट जाएँगीं

है जो खुद पे गुमान जिंदा रख

 

तेरा बचपन ही मर न जाय कहीं

वो पुराना मकान जिंदा रख

 

बेज़बानों से कुछ तो सीख मियाँ

तू भी अपनी ज़बान जिंदा रख

 

नोट चलता हो प्यार का भी जहाँ

एक ऐसी दुकान जिंदा रख

 

जान तुझमें ये डाल देंगे कभी

नाक, आँखें व कान जिंदा रख

---------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 744

Comment

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Comment by बृजेश नीरज on June 2, 2013 at 7:57pm

बहुत ही सुन्दर! विशेष दाद रचना के तेवर को! मेरी बधाई स्वीकारें!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on June 2, 2013 at 7:51pm

पुरकशिश ग़ज़ल.. वाह एक से बढ़ कर एक शे'र ..

तेरा बचपन ही मर न जाय कहीं

वो पुराना मकान जिंदा रख-- बेहतरीन लगा.. सादर,

Comment by ram shiromani pathak on June 2, 2013 at 4:19pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी,

तेरा बचपन ही मर न जाय कहीं

वो पुराना मकान जिंदा रख ... वाह

उम्दा ग़ज़ल हार्दिक बधाई ////////////

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on June 2, 2013 at 12:39pm

बाजुओं की थकान जिंदा रख

जीतने तक उड़ान जिंदा रख... वाह!!

आदरणीय धर्मेन्द्र जी, इस बढ़िया गजल के लिए सादर बधाई स्वीकारें....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 2, 2013 at 12:12pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी,  इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक धन्यवाद.

हर शेर में ताव है, बहाव है.

ढेर सारी दाद कुबूल करें

शभम्

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 2, 2013 at 12:06pm
"आदरणीय...शुभकामनायें, बेहतरीन गजल " तेरा बचपन ही मर न जाय कहीं, वो पुराना मकान जिंदा रख ".....वाह! धर्मेन्द्र जी...वाह
Comment by DRx Ravi Verma on June 2, 2013 at 12:03pm

sundar joshila andaaj

Comment by aman kumar on June 2, 2013 at 11:32am

जीवन की सच्चाई !...........अति सुंदर !

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 2, 2013 at 11:16am

वाह वाह वाह गज़ब गज़ब गज़ब अप्रितम आदरणीय सभी के सभी अशआर लाजवाब हुए हैं, खासकर इन दो अशआरों हेतु विशेष तौर पर दाद कुबूल फरमाएं. इस मुकम्मल ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई. जय हो

आँधियाँ डर के लौट जाएँगीं

है जो खुद पे गुमान जिंदा रख ... लाजवाब

 

तेरा बचपन ही मर न जाय कहीं

वो पुराना मकान जिंदा रख ... वाह वाह वाह

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