For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुन्दरता इसको घेरी है 
मादकता इसमें पिरोई है 
मीठे में मिश्री जैसा मेरा गाँव 
सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव 

उंच नीच का भेद नहीं है 
शहरों जैसा क्लेश नहीं है 
फूलों में गुलशन जैसा मेरा गाँव
सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव 

सुन्दरता तरुओं की प्यारी 
मादकता सरसों की सारी 

सान्झो में सूरज जैसा मेरा गाँव 
सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव 

नदियों की कल कल है इसमें 
झरनों की झर झर है इसमें 
चिड़ियों में कोयल जैसा मेरा गाँव 
सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव

हरियाली रहती खेतों में 
खुशहाली रहती पेड़ों में 
अँधेरे में दीपक जैसा मेरा गाँव 
सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 738

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Devendra Pandey on July 8, 2013 at 11:20am

Adarniyo ko sadarr dhanyawad 

Comment by MAHIMA SHREE on July 7, 2013 at 3:16pm

सुंदर प्रस्तुती ... बधाई आपको

Comment by वेदिका on July 7, 2013 at 6:35am

बहुत खूब सुंदर तस्वीर उकेरी है आपने ये गाँव की,,

//उंच नीच का भेद नहीं है // 

इस पंक्ति पे इतना जरुर कहना चाहूंगी की ऊँच नीच का भेद गाँव में बहुत जोरों पर है, यहाँ जाति तो छोडिये, उपजातियों में भी बेहद छुआछूत अब भी चलती है!  

शुभकामनाये!! 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 7, 2013 at 1:06am
""नदियों की कलकलहै इसमें झरनों की झरझरहै इसमें चिड़ियों में कोयलजैसा मेरागाँव सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव'

हरियाली रहती खेतों में खुशहालीरहती पेड़ों में अँधेरेमें दीपक जैसा मेरा गाँव सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव""...आदरणीय..देवेन्द्र भाई, सचमुच शहर से दूर गांव की बात ही निराली है! कितना सुकुन रहता है वहाँ, केवल पंछियों की चहचहाना, नदियों कलकलाहट, हवा की सरसराहट! खेतों की हरियाली! वाह ...! हार्दिक बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service