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Devendra Pandey's Blog (6)

मुक्तक

आपकी याद आई खुशी दे गयी।

होंठ में इक मधुर सी हँसी दे गयी।।

जाम हाथों मे हमने न थामा कभी।

आज तेरी छुअन बेखुदी दे गयी।।

  //मौलिक व अप्रकाशित//

Added by Devendra Pandey on November 6, 2017 at 2:30pm — 6 Comments

दिगपाल छंद

(दिगपाल छंद विधान:- यह छंद 24 मात्रायों का, जिसमें 12 -12 में यति के साथ चरण पूर्ण होता है)

तजि अधर्म,कर्म,सुधर्म कर,
गीता तुझे बताए I 
हों शुद्ध,बुद्ध,प्रबुद्ध सब,
निज धर्म को न भुलाए I I 

धर नव नीव स्वधर्म की,
शिव ही सत्य मानिए I 
छोड़ सकल लोभ मोह,
ऒम ही सर्व जानिए I I

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Devendra Pandey on October 26, 2013 at 3:00pm — 18 Comments

-गीत

प्रेम में मगन मैं, होने लगा हूँ

जग से नाता तोड़ चला हूँ,मैं

जग से नाता तोड़ चला हूँ

प्रेम में मगन मैं, होने लगा हूँ

उनसे मिलन की, आस लिए

अंधरों बड़ी प्यास, लिए

दर बदर मैं, भटक रहा हूँ, हाँ

दर बदर मैं, भटक रहा हूँ

प्रेम में मगन मैं, होने लगा हूँ

आएगी कब वह, रात सुहानी

होंगी जब वो,मेरी दीवानी

रात और दिन यही, सोच रहा हूँ, मैं

रात और दिन यही, सोच रहा हूँ

प्रेम में मगन मैं, होने लगा हूँ

हर…

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Added by Devendra Pandey on October 11, 2013 at 3:30pm — 9 Comments

मेरा गाँव

सुन्दरता इसको घेरी है 

मादकता इसमें पिरोई है 

मीठे में मिश्री जैसा मेरा गाँव 

सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव 



उंच नीच का भेद नहीं है 

शहरों जैसा क्लेश नहीं है 

फूलों में गुलशन जैसा मेरा गाँव

सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव 



सुन्दरता तरुओं की प्यारी 

मादकता सरसों की सारी …

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Added by Devendra Pandey on July 6, 2013 at 2:30pm — 4 Comments

लोकगीत



मेरे पिया गए परदेश रे 

ना मनवा लागे रे 

सावन आया 

ददुरबा बोले 

ददुरबा बोले ददुरबा बोले 

बादल गरजे तेज रे 

ना मनवा लागे रे 

चिठ्ठी आयी ना 

पाती आयी 

ना आया कोई सन्देश रे 

ना मनवा लागे रे

सोलह श्रृंगार 

ना मन को भाये 

मन को भाये न मन को भाये

भाये ना ये देश रे 

ना मनवा…

Continue

Added by Devendra Pandey on July 2, 2013 at 11:00am — 13 Comments

पीड़ा

मैंने देखा है ज़िन्दगी को पास से 

मैंने सुना है  उन आंसुओं की  हर एक अवाज  को 
जो चुप चाप मन में घोर विषाद लिए निकल रहे हैं 
मैंने देखा है एक रोटी के लिए बिलखते मासूमों को,
जिन्होंने ज़िन्दगी का प्रथम चरण भी नहीं देखा 
जिन्हें मा कहना भी ढंग से नहीं आता,
सच बहुत दुःख होता है इनको देखकर,
क्यों ऐसा होता है ?
 
क्या…
Continue

Added by Devendra Pandey on June 29, 2013 at 12:29pm — 12 Comments

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