For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

(दिगपाल छंद विधान:- यह छंद 24 मात्रायों का, जिसमें 12 -12 में यति के साथ चरण पूर्ण होता है)

तजि अधर्म,कर्म,सुधर्म कर,
गीता तुझे बताए I 
हों शुद्ध,बुद्ध,प्रबुद्ध सब,
निज धर्म को न भुलाए I I 

धर नव नीव स्वधर्म की,
शिव ही सत्य मानिए I 
छोड़ सकल लोभ मोह,
ऒम ही सर्व जानिए I I

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 1721

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 2, 2013 at 5:48am

कवि देवेन्द्रजी, यह क्या कर रहे हैं आप ?

यदि आप रचनाकर्म के प्रति निश्चयी हैं तो सुनिये, कि, उत्साह मात्र छांदसिक रचनाकर्म को साधने का माध्यम और कारण होता तो सभी अनायास छंदबद्ध रचनायें करते.


मात्रिक छंदों की रचना के साथ एक बात और होती है जो पदों की मात्राओं की गणना के पहले होती है जिसे शब्द-संयोजन कहते हैं. यानि पद और चरणों में सम और विषम शब्दों का क्रमवार आना. आपकी पंक्तियाँ उसका अनुपालन तो नहीं ही करती हैं. आपने जो दिगपाल छंद के बारे में अपने संक्षिप्त विधान में लिखा है उसको भी आप मानते नहीं दीखते.
१२-१२ की यति आप कहते तो हैं लेकिन शायद आपको मालूम ही नहीं है कि इसका अर्थ होता क्या है. वर्ना तजि अधर्म,कर्म,सुधर्म कर  या शुद्ध,बुद्ध,प्रबुद्ध सब, या निज धर्म को न भुलाए  आदि चरणों की कुल कितनी मात्राएँ हो रही हैं, यह बात आपको स्पष्ट समझ में आ जाती.

आपका प्रयास सम्माननीय है. लेकिन आप अपने रचनाकर्म को गंभीरता से लें तो ही आपकी रचनाओं की प्रतिष्ठा होगी.
आदरणीया प्राचीजी ने बहुत कुछ स्पष्ट कहा है. उसके अनुसार छंद रचना करें, भाईजी.
शुभेच्छाएँ
 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 30, 2013 at 11:38pm

आ०  देवेन्द्र पाण्डेय जी 

आपने दिगपाल छंद का जो विधान साझा किया है , आपकी प्रस्तुति मात्रिकता के लिहाज से उसका पालन नहीं करती 

सनातनी छंदों में मात्रिकता के प्रति पूर्णतः संवेदन शील होना ही चाहिए. 

दिगपाल छंद चार पदों का छंद है जिसमें प्रति पद १२, १२ पर यति होती है.

दो -दो पदों में समतुकांतता होती है 

प्रत्येक चरण का अंत दो दीर्घ से किया जाता है.... इस छंद के विधान पर मेरी जानकारी इतनी ही है.

सुधि जानकार विस्तार से विधान को साझा करें ताकि दोहा और रूपमाला छन्द के काफी करीबी इस छंद के बारे में भी सबको जानकारी प्राप्त हो सके!

सादर 

Comment by Devendra Pandey on October 29, 2013 at 2:00pm

Adarniya Doctor Saab Mere Adhyayan Anusaar to Itna Hi Chhand Vidhaan hai Is Chhand, Magar Aapko Lag Rha hai to krapya Is Sandarbh mein Prakash Daalein Jisse Main Aswasth ho sakoon Sadarr. 

Comment by Dr Ashutosh Vajpeyee on October 28, 2013 at 6:17pm

जहाँ तक मेरा ज्ञान है बन्धु यह छन्द शास्त्रीय नहीं है कहाँ पढ़ा आपने और पूरा विधान भी कुछ स्पष्ट नहीं हुआ 

Comment by Devendra Pandey on October 28, 2013 at 4:12pm

Jee Adarniya Is chhand Ke Antargat 12 -12 mein yati ka vidhaan to nishchit hai parantu mere alpgyan anusaar lagu guru ka vichaar nhn kiya gaya hai 

Comment by राजेश 'मृदु' on October 28, 2013 at 3:00pm

आपका सद्प्रयास रूचिकर लगा किंतु छंद विधान स्‍पष्‍ट समझ नहीं पाया, 24 मात्रा का विधान एवं 12-12 का क्रम तो समझ गया पर लघु-गुरु कहां हों या नहीं हों इसे भी स्‍पष्‍ट कर दें तो सुगमता होगी, सादर

Comment by Devendra Pandey on October 28, 2013 at 11:36am

Adarniya Ramesh Kumar Chauhan Jee Snehil Tippani,Pratikriya ke liye Aapka Bahut bahut Abhaar 

Comment by Devendra Pandey on October 28, 2013 at 11:35am

Adarniya Laxman Prasad Ladiwala Sir Aapka Hardik Abhaar 

Comment by रमेश कुमार चौहान on October 27, 2013 at 11:03pm

तजि अधर्म,कर्म,सुधर्म कर,
गीता तुझे बताए I ---------------------बहुत ही सुंदर भाईजी बहुत बहुत बधाई

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 27, 2013 at 10:39pm

अधर्म को त्याग कर "सत्यम शिवम् सुन्दरम" अपनाने का आह्वान करती सुन्दर रचना के लिए बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय अबोध बालक जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार। "
16 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' नमस्कार। भाई बहुत बहुत धन्यवाद। "
16 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय गुरप्रीत सिंह 'जम्मू' जी आभारी हूँ। आपने सही कहा ,सर् का मार्गदर्शन मिलना हमारी…"
16 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। बहुत खूबसूरत आपने मतला बना दिया। सच बताऊं सर् मैंने जो सानी बदलने के…"
16 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"धन्यवाद लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी, मेरी तरफ़ से भी आपको और सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ परिवार के समस्त सदस्यों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ..."
yesterday
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"गजल में आपकी सादगी का गुमां मुझको हुआ है //लम्हा लम्हा हरफ ब हरफ बानगी से जुडा हुआ है…"
Monday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"बहुत शुक्रिय: प्रिय ।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"रूह के पार मुझको बुलाती रही' क्या कहने.. आ. भाई समर जी।"
Monday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"भाई गुरप्रीत सिंह जी आदाब, बहुत अर्से बाद ओबीओ पर आपको देख कर ख़ुशी हुई ।"
Monday
Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"/रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही वाह वाह आदरणीय समर…"
Monday
Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार। बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल का प्रयास आपकी तरफ से । पहले दोंनों अशआर बहुत…"
Monday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service