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आपकी याद आई खुशी दे गयी।

होंठ में इक मधुर सी हँसी दे गयी।।

जाम हाथों मे हमने न थामा कभी।

आज तेरी छुअन बेखुदी दे गयी।।

  //मौलिक व अप्रकाशित//

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 12, 2017 at 9:21am
हार्दिक बधाई।
Comment by anamika ghatak on November 10, 2017 at 10:55pm

 बेहद उम्दा व लाजवाब

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 10, 2017 at 4:24pm

भाई देवेन्द्र जी इस सुंदर प्रस्तुति के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार करें सादर

Comment by Samar kabeer on November 8, 2017 at 5:01pm
जनाब देवेन्द्र जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ajay Tiwari on November 8, 2017 at 10:53am

आदरणीय देवेन्द्र जी,

अच्छे शेर निकाले हैं. हार्दिक  शुभकामनाएं.

सादर    

Comment by Mohammed Arif on November 6, 2017 at 5:01pm
बहुत ही प्यारा मुक्तक देवेंद्र साहब । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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