For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मत्त सवैया - दो छंद

बादल भी है नुचा हुआ सा, वसुधा भी है टुकड़े टुकड़े 

शर्म हया भी बिकी हुई है, भारत के है चिथड़े चिथड़े 
भीष्म पितामह शर शय्या पर, सुत मा या में द्रोण पड़े है 
शीश गिराते कौरव देखो , शस्त्र यहाँ पर मौन पड़े हैं 
_______________________________________
सीमा तो अब नहीं देश में , शत्रु घुसा है किसी जेब में 
रुपया तो बीमार वेश में , बाढ़ घुसी है ग्राम केश में 
रोटी फेंक फेंक हम कहते, काम करो मत तुम इस लत में 
रोजगार तो दे न सकें है ,  भारत पीछे विश्व रेस में 
मौलिक व अप्रकाशित 
आशीष श्रीवास्तव (सागर सुमन) 

Views: 1583

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 31, 2013 at 12:57pm

भाई आशीषजी, अपनी व्यस्तता के चलते मैं आपकी प्रस्तुति पर अभी आ पा रहा हूँ, इसका खेद है. विश्वास है, आप मेरी विवशता समझेंगे.

आपकी संवेदनशील रचना के लिए आपका धन्यवाद लेकिन आपकी रचना जिस छंद में बतायी गयी है उसमें तो है ही नहीं. आपकी रचना मत्त सवैया है ही नहीं.

सामान्य पाठकों के लिए स्पष्ट कर दूँ कि मत्त सवैया सवैया छंदों या उसके अन्य प्रारूपों की तरह वर्णिक छंद नहीं है, बल्कि यह मात्रिक छंद है और ३२ मात्राओं के पद का होता है जहाँ १६-१६ पर यति होती है. यह चार पद समूह का छंद है जिसमें दो-दो पदों की तुकान्तता बनती है. मगर इतना ही नहीं है, बल्कि इसके अलावे एक अत्यंत गूढ़ किन्तु निर्णायक बात होती है जो मैं भाई आशीष जी के उत्तर के बाद स्पष्ट करूँगा.

अब, आशीष भाईजी, आपने मत्त सवैया को किस मात्रिकता के आधार पर या किस विधान के अनुसार समझा है या समझने की कोशिश की है आप जरा बतायेंगे, भाई ?  ताकि मैं आश्वस्त हो सकूँ.

इसी कारण इस मंच पर सभी रचनाकारों से छंद-रचनाओं को पोस्ट करने पर उसके संक्षिप्त विधान को भी साझा करने का आग्रह होता है. या, ग़ज़लकारों से ग़ज़ल के विन्यास को भी साझा करने का आग्रह होता है. ताकि न केवल सीखते हुए पाठक या रचनाकार बल्कि पोस्ट करता हुआ रचनाकार और ग़ज़लकार भी स्वयं आश्वस्त रहे कि वह जो कुछ पोस्ट कर रहा है उसमें कोई दोष नहीं है.

सादर

Comment by Ashish Srivastava on August 30, 2013 at 9:39pm

गिरिराज भंडारी 

स्नेह आप सबका मिले , मिले मुझे आशीष 

नित रच दूँ एक काव्य को, यही कामना ईश 

Comment by Ashish Srivastava on August 30, 2013 at 9:37pm

श्याम जुनेजा जी  

पहले कुछ मैं सीख लूं , फिर पकडू जड पात

क्या था कैसे हो गया , कलम कहे फिर बात

------------------------------------- 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2013 at 9:35pm

आदरणीय आशीष भाई,बहुत  सुन्दर  लगी  आपकी  रचना  मुझे  हार्दिक  बधाई  आपको //सादर  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 30, 2013 at 5:11pm

आदरणीय आशीष भाई , चन्द लाइनो मे वर्तमान का अच्छा चित्रण किया आपने , बधाई !!

Comment by Ashish Srivastava on August 30, 2013 at 3:43pm

आदरनीय रविकर जी 

बहूत बहूत धन्यवाद 

Comment by Ashish Srivastava on August 30, 2013 at 3:42pm

ब्रजेश जी : धन्यवाद एवं आभार

 

Comment by Ashish Srivastava on August 30, 2013 at 3:42pm

अरुण शर्मा जी , आभार आपका और मनोबल बांधे रखने के लिए 

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 30, 2013 at 11:34am

बहुत ही सुन्दर रचना भाई वाह बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by बृजेश नीरज on August 29, 2013 at 7:48pm

बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है आपने! बहुत खूब! आपको हार्दिक बधाई!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service