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एकाकी, एकाकी
जीवन है एकाकी...
मैं भी हूँ एकाकी,
तू भी है एकाकी,
जीवन पथ पर चलना है
हम सबको एकाकी I
 

ना कोई तेरा है,
ना है किसी का तू,
मोह-माया के फेरे में
जीवत्व है एकाकी I

 

आया तू अकेला था,
जाएगा भी अकेला ही,
आने-जाने के इस क्रम में
होना है एकाकी I
 

संसार के मेले में,
भ्रमों का रेला है,
बहने की है नियती
जड़ को तो बहना है,
स्मरण मगर रख ले
चेतन ये एकाकी I

 

ये तन है क्षण भन्गुर,
पल में मिट जाएगा,
माटी का है ढेला ये,
माटी में ही मिल जाएगा,
तन के इस सुख-दुख में
खुद को रख एकाकी I

 

लाया ना संग कुछ भी,
जाना भी है खाली हाथ,
कर्मों का इक लेखा
होगा बस तेरे साथ,
द्वार पर परमात्मा के
हर आत्मा है एकाकी I

 

एकाकी, एकाकी
जीवन है एकाकी...

Views: 782

Comment

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Comment by sanjiv verma 'salil' on December 27, 2010 at 8:27am
सनातन सत्य को उद्घाटित करती रचना. शब्द चयन से कुछ अंतर्विरोध और असंगति प्रतीत होती है.

लाया ना संग कुछ भी,
जाना भी है खाली हाथ,
कर्मों का इक चोला
होगा बस तेरे साथ,
द्वार पर परमात्मा के
हर आत्मा है एकाकी I

खाली हाथ जाना है तो कर्मों का चोला कैसे साथ होगा?
(चोला = आवरण, ढीला-ढाला कुरता, देह , शरीर.
चोला बदलना = एक शरीर त्यागकर दूसरा धारण करना.
देखें वृहत हिन्दी कोष, पृष्ठ ३८६)
कर्मों का न तो कुरता जा सकता है, न कर्मों की देह जा सकती है.
मेरी समझ में 'चोला' के स्थान पर 'लेखा' अधिक उपयुक्त होता.

सत्य यह भी कि आना-जाना एकाकी होने पर भी इसके बीच का जीवन सामाजिक ही बिताना है. आने से जाने के बीच एकाकी रहे तो जीवन ही न होगा.

एकाकी आना है,
एकाकी जाना है.
एकाकी जीवन को
हमें ना बनाना है.
संग-साथ सुख-दुःख सह
सलिल मुस्कुराएंगे.
स्वर्ग भू पे लायेंगे...
Comment by DEEP ZIRVI on December 27, 2010 at 6:59am

मोह-माया के फेरे में
जीवत्व है एकाकी I

utttm


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 26, 2010 at 4:49pm

ये तन है क्षण भन्गुर,
पल में मिट जाएगा,
माटी का है ढेला ये,
माटी में ही मिल जाएगा,

यथार्थ यही है जैन साहब , एक दिन सबको समाप्त हो जाना है .... कृति ही दुनिया मे अमर रहेगी , बाकी सब बकवास ,

सुंदर रचना,

एकाकी, एकाकी
जीवन है एकाकी... बधाई बधाई इस रचना पर बधाई ...

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