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याद है जब एक साल तुम्हारा ग्रीटिंग मुझे नहीं पहुंचा था...
ग्रीटिंग जिसके भीतर मैं तुमको पढता था...
जिसके एक-एक हर्फ़ से अफ़साने गढ़ता था
बहुत पुरानी बात है वो भी नया साल था.......
कई दिनों तक रक्खी थीं उम्मीद होल्ड पर...
...आज भी बीता बरस सिराने जाता हूँ....
आज भी रूठा हुआ साल, हर साल मनाता हूँ........

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Comment by Sudhir Sharma on January 18, 2011 at 11:45pm
  • दिनों नेट पर नहीं आ पा रहा... अम्मा बहुत बीमार चल रही हैं...पर लोतुँगा ज़रूर...
Comment by Sudhir Sharma on January 2, 2011 at 4:00pm
ganesh ji mafi chahta hoon...mobile seva se cooment karne par naam ka confusion ho gaya...

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 2, 2011 at 12:34pm
naveen ji  :-(  :-(
Comment by Sudhir Sharma on January 2, 2011 at 12:30pm
dhanywad naveen ji....meri or se bhi nav vrsh ki badhayi sweekaren...

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 2, 2011 at 10:49am
बहुत खूब सुधीर जी, यादों को सहेजने का अंदाज आपका अनोखा है | नव वर्ष और खुबसूरत रचना हेतु बधाई स्वीकार करे |

कृपया ध्यान दे...

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