For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

संवेदनाओं के 

अंतर गुन्जन पर 

भाव लहरियों का 

निःशब्दित नृत्य..

इस ओर से उस छोर 

उस छोर से इस ओर

विलयित तटबन्ध..

लहर लहर मन 

आनंदित 'नील सागर'

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 1222

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on October 2, 2013 at 10:41pm

इस सुन्दर और मधुर सृजन को साझा करने के लिए धन्यवाद, आदरणीया।

Comment by MAHIMA SHREE on October 2, 2013 at 9:21pm

अप्रतिम .. एक अलग ही भाव में बहा ले जाती ... हार्दिक बधाई आदरणीया प्राची जी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 5:40pm

आदरणीय बृजेश नीरज जी 

आप सम प्रबुद्ध संवेदनशील रचनाकार और सजग पाठक यदि किसी रचना पर ठहरे.. रुक जाए और रचना सन्निहित भाव विचार तंतुओं को स्पंदित करने में सक्षम हों तो अवश्य ही रचनाकार के लिए मान की बात है.

इस अनमोल उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से धन्यवाद 

सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 5:36pm

आदरणीय गणेश बागी जी 

रचना की भाव कथ्य सांद्रता को आपने विशेष रूप से अनुमोदित कर के अभिव्यक्ति को मान दिया है और मेरे लेखन को बहुत प्रोत्साहन मिला है.. इस बहुमूल्य सराहना के लिए सादर आभार आदरणीय.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 5:33pm

रचना का शब्द संयोजन और निहित भाव आपको पसंद आये यह जान लेखनी को प्रोत्साहन मिला है 

सादर धन्यवाद आ० नीरज कुमार जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 5:30pm

आदरणीय अरुण निगम जी 

रचना के मर्म को स्पर्श कर उत्साहवर्धक सराहना करने के लिए हार्दिक धन्यवाद 

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 5:28pm

रचना के अर्थ की गहनता पर आपके अनुमोदन के लिए सादर आभार आ० अनुराग सैनी जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 5:27pm

प्रस्तुति के भाव व शब्दों पर आपका उत्साहवर्धक अनुमोदन बहुत सुकून प्रदान कर रहा है आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी 

सादर धन्यवाद 

Comment by बृजेश नीरज on October 2, 2013 at 5:27pm

 आपकी हर रचना की तरह भावों को गहनता से पिरोये हुए आपकी ये रचना भी ठहरने, ठिठकने और सोचने पर मजबूर करती है! अनुपम रचना! इस सुन्दर अभिव्यक्ति पर आपको हार्दिक बधाई!

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 5:26pm

प्रिय अनुज अरुण शर्मा जी 

अभिव्यक्ति के भाव और प्रयुक्त शब्द आपको पसंद आये.. यह लेखन के प्रति आश्वस्तिकारी है 

आपका हार्दिक धन्यवाद 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service