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नज्म ...........मुलाक़ात अधूरी है

              १

ना जाओ अभी कि मुलाक़ात अधूरी है !

तेरे – मेरे मिलन की हर बात अधूरी है !

 जाने क्यों चल दिए तुम दामन छुडाकर!

शबनमी आँखों से लाज के मोती गिराकर !

पुरसुकूं हुस्न की एक झलक दिखाकर !

अभी नही बुझी आँखों की प्यास अधूरी है !

ना जाओ अभी कि मुलाक़ात अधूरी है !

तेरे – मेरे मिलन की हर बात अधूरी है !

               २

काली बदलियों का आँखों में काजल लगाकर !

कांच के पैमाने में मय का जाम थमाकर !

रुखसारो पे अश्को की शबनम गिराकर !

भीग जाएगा बदन कि बरसात अधूरी है !

ना जाओ अभी कि मुलाक़ात अधूरी है !

तेरे – मेरे मिलन की हर बात अधूरी है !

              ३

सोये सोये से दिल के अरमान जगाकर !

जवाँ जवाँ धडकनों के जज्बात जगाकर !

आशिक को इश्क की औकात जताकर!

रुक जाओ अभी कि रात अधूरी है !

ना जाओ अभी कि मुलाक़ात अधूरी है !

तेरे – मेरे मिलन की हर बात अधूरी है !

डॉ. अनुराग सैनी

मौलिक व अप्रकाशित

 

 

 

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Comment

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Comment by Sushil.Joshi on October 4, 2013 at 6:30am

बहुत सुंदर रचना है आदरणीय अनुराग जी.... बधाई हो...

Comment by annapurna bajpai on October 3, 2013 at 10:08pm

आदरणीय अनुराग जी सुंदर रचना हेतु बधाई स्वीकारे । 

Comment by बृजेश नीरज on October 3, 2013 at 7:40pm

अच्छी रचना है! आपको हार्दिक बधाई इस प्रयास पर!

मेरी समझ में एक बात आती है वो कोई भी रचना जिसे हम गीत या ग़ज़ल के शिल्प में न बांध सकें, नज़्म नहीं होती. बेहतर होता है की हम रचना को गीत या ग़ज़ल का ही शिल्प ही देने का प्रयास करें. आप इस दिश में प्रयास करें, आपसे इस मंच को बहुत अपेक्षाएं हैं.

सादर!

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 3, 2013 at 5:16pm

आप सभी के निरंतर मार्गदर्शन से उत्साहित हूँ और निरंतर सुधार की दिशा में प्रयासरत हूँ ! आभार 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 3, 2013 at 3:27pm

आदरणीय अनुराग जी ..इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक् बधाई स्वीकार करें 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 3, 2013 at 1:45pm

आदरणीय अनुराग भाई , सुन्दर रचना के लिये बहुत बधाई !!!

Comment by coontee mukerji on October 3, 2013 at 1:41pm

सोये सोये से दिल के अरमान जगाकर !

जवाँ जवाँ धडकनों के जज्बात जगाकर !

आशिक को इश्क की औकात जताकर!

रुक जाओ अभी कि रात अधूरी है !

ना जाओ अभी कि मुलाक़ात अधूरी है !

तेरे – मेरे मिलन की हर बात अधूरी है...................बहुत सुंदर.

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 3, 2013 at 12:36pm

आदरणीय अनुराग जी अच्छी प्रस्तुति बधाई स्वीकारें आपसे और अधिक सुन्दर रचना पढ़ने की प्रतीक्षा है.

Comment by रविकर on October 3, 2013 at 11:16am

सुन्दर प्रस्तुति
आभार आदरणीय अनुराग जी-


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on October 3, 2013 at 8:44am

आदरणीय अनुराग जी,भावपूर्ण  सुंदर रचना के लिये बधाई, नज्म के शिल्प पर विद्वजन कह पायेंगे.

कृपया ध्यान दे...

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