For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कलाम सबकी जुबाँ पर है लाकलाम तेरा।
सलाम करता है झुक कर तुझे गुलाम तेरा।

वो पाक़ साफ है इल्जाम न लगा उस पर,
करेगा काम वो वैसा ही जैसा दाम तेरा।

किसी को ताज़ किसी को दिये फटे कपड़े,
बड़े गज़ब का है दुनिया मे इन्तजाम तेरा।

जो अपने आप को पहुँचा हुआ समझते हैं,
समझ में उनके भी आता नहीं है काम तेरा।

तेरे ही नाम से होते हैं सारे काम मेरे,
मैं मरते वक्त तक लेता रहूँगा नाम तेरा।

मौलिक अप्रकाशित अप्रसारित 

Views: 1083

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on October 5, 2013 at 10:11pm

आदरणीय श्री सदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवाशी साहब

गजल में दोष की तरफ इसारा करने के लिये धन्यवाद। दरअसल हिन्दी प्रकृत के अनुसार 'ना पढ़ते जरूर हैं परन्तु लिखते 'न हैंं।
वक्त+तक जब पढ़ते हैं तो 'त साइलेन्ट हो जाता है ऐसा आभास होता है परन्तु यह दोष है इसे मैं मानता हँ। पुन: हिन्दी ने बिन्दी कभी स्वीकार नहीं किया। क्याकि उदर्ू मे 'ज के लिये इतने अक्षर है - जीम, जाल, जे , जे, ज्वाद । चार अक्षरो के लिये कितनी बिनिदयाँ कहाँ - कहँ बेचारी हिन्दी माता लगायेंगी इसलिये हिन्दी को हिन्दी के मीटर से नापें बजाये उदर्ू के मीटर से नापने के। पुन: सटीक इसलाह के लिये धन्यवाद।

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 5, 2013 at 9:11pm

बहुत खूब कही आपने सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको !

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on October 5, 2013 at 8:26pm

भाई रामअवध जी,

ग़ज़ल विधा पर अत्यंत ही सुघड़ प्रयास। आद. गिरिराज जी ने उचित कहा है! भाव सम्प्रेषण निश्चय ही बहुत अच्छा है किन्तु शिल्प पर थोड़ी और मश्क़ की ज़रूरत महसूस हो रही है। गिरिराज जी ने जहाँ इंगित किया है वहाँ तो दोष नहीं है किन्तु दो मिस्रों में शिल्पगत दोष उपस्थित है और आपकी जानकारी को देख कर यह निश्चित है कि आप इस दोष का निवारण अत्यंत ही सरलता के साथ कर सकते हैं।

मेरी अल्प जानकारी के अनुसार यह बह्रे मुज़ारे मुसम्मन मुरक़्क़ब मक़्बूज़ मख़्बून महज़ूफ़ो मक़्तुअ [1212/1122/1212/22{112}] है।
//वो पाक साफ है इल्ज़ाम लगा उस पर, करेगा काम वो वैसा ही जैसा दाम तेरा।// -- इल्ज़ाम न लगा उस पर -- 22/1112/22 हो रहा है (बोल्ड पर ध्यान दें)। बह्र निभाने के लिए यहाँ 'न' के स्थान पर 'ना' होना चाहिए किन्तु यह ग़ज़ल की परंपरा में अनुमत्य नहीं है।

//मैं मरते वक़्त तक लेता रहूँगा नाम तेरा।// यह 1212/1222/1212/112 हो रहा है (पुनः बोल्ड पर ध्यान दें)।

साथ ही यदि आप उर्दू वर्तनी (ख़ास तौर से नुक़्तों पर) भी ध्यान दें तो शानदार ग़ज़ल है। आशा है आद. गिरिराज जी भी इस टिप्पणी पर दृष्टिपात कर रहे होंगे।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 6:12pm

आदरणीय राम भाई , मै भी बहुत जानकार तो नही हूँ , अभी सीख रहा हूँ , पर आपके दिये गये बह्र के हिसाब से , मात्रा क्रम --1212     1122    1212   22 , आना चाहिये , ऐसा मुझे लगता है , दो शेर की तक्तीअ करने का प्रयास किया हूँ , आप कैसे किये है मुझे नही मालूम !!! अगर मेरी तक्तीअ गलत लगे तो क्षमा करें !! किसी जानकार से तकतीअ करा कर देख लें !! सादर !!

१२१२(मुफ़ाइलुन),  ११२२(फ़इलातुन) , १२१२(मुफ़ाइलुन), फैलुन् -22

आदरणीय आपके अनुसार मात्रा क्रम ---1212 --1122 -- 1212 --22 आना चाहिये

1212           1122          12121      22 

कलाम सब/ की जुबाँ पर /  है लाकलाम /तेरा।

1212         1122            12121         22

सलाम कर/ता है झुक कर/ तुझे गुला म / तेरा

1212         1122         1112        22

वो पाक़ सा/ फ है इल्जा/ म न लगा /उस पर,

  1212     1122        12121        22

करेगा का/म वो वैसा/ ही जैसा दाम /तेरा  ----------------------कृपया  आप भी तकतीअ कर के देख लें !!!!!

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on October 5, 2013 at 2:21pm

आदरणीय श्री भण्डारी जी टिप्पणी के लिये धन्यवाद। मेरे ज्ञान के अनुसार गजल पूर्णतय:गजल शिल्प में है। बहर है -
मुफाइलुन         फइलातुन       मुफाइलुन         फेलुन

कलामसब        कीजुबाँपर       हैलाकलाम         तेरा
कृपया बताने का कष्ट करें गजल में कहाँ पर गल्ती हुर्इ है जिससे मैं अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकूँ

Comment by Saarthi Baidyanath on October 5, 2013 at 11:28am

बढ़िया :)


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 11:16am
आदरणीय राम अवध भाई , सुन्दर भाव , सुन्दर रचना के लिये बधाई !! रचना गज़ल् के शिल्प मे नही लग रही है , अगर आपने गज़ल कही है तो !!!!
Comment by annapurna bajpai on October 4, 2013 at 11:46pm

आ0 राम अवध जी इस सुंदर रचना हेतु बहुत बधाई आपको । 

Comment by Sushil.Joshi on October 4, 2013 at 9:52pm

तेरे ही नाम से होते हैं सारे काम मेरे,
मैं मरते वक्त तक लेता रहूँगा नाम तेरा..... वाह वाह आदरणीय राम अवध जी.... बहुत सुंदर..... बधाई हो..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service