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आया सावन का मस्त महीना---

ये कैसी है चम् चम् चम् चम् ,

क्यों  बहक रहा है मन,

टूटकर घटा से बरसे पानी,

हो गयी है रुत मस्तानी,

चारो और छायी हरियाली ,

जंगल मनाने लगा दिवाली ,

ऐसे बहे ठंडी बयार,

सपनो से हो जाए प्यार,

तन से टपके सुगन्धित  पसीना ,

लो आया सावन का मस्त महीना !

तन की बजने लगी सितार ,

आँखें देखे सपने हजार,

अपने प्रियतम का करे इंतज़ार ,

जैसे कोई दुल्हन मस्तानी ,

कैसे खुद को काबू कर पाए ,

कैसे अपने दिल को समझाए ,

निंदिया यूँ बैरन हो जाए ,

कामनाये दिन रात जगाये ,

फिर भी उम्मीदे ऐसे चमके ,

जैसे चमके कोई नगीना ,

लो आया सावन का मस्त महीना !

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:47am

बेहद खूबसूरत प्रस्तुति आदरणीय अनुराग जी..... बधाई हो...

Comment by vijay nikore on October 6, 2013 at 12:24am

आनन्द आ गया...

बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 6, 2013 at 12:06am

बहुत बढिया डॉक्टर साहब. आपकी कई रचनाएँ देख गया, वाह !

शुभेच्छाएँ

कृपया ध्यान दे...

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