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गीत (पृष्ठ ह्रदय के जब मैं खोलूँ)

गीत (पृष्ठ ह्रदय के जब मैं खोलूँ)

पृष्ठ ह्रदय के जब मैं खोलूँ, केवल तुम ही तुम दिखते हो,

जैसे पूछ रही हो मुझसे, क्या मुझ पर भी कुछ लिखते हो।

 

तुम नयनों से अपने जैसे

कोई सुधा सी बरसाती हो,

कैसे कह दूँ संग में अपने

नेह निमंत्रण भी लाती हो,

फिर भी कहती हो तुम मुझसे, क्यों मुझ में ही गुम दिखते हो,

पृष्ठ ह्रदय के जब मैं खोलूँ, केवल तुम ही तुम दिखते हो।

 

वाणी तुम्हारी वेद मंत्र सी

पावन दिल को छूने वाली,

और रसीले अधर तुम्हारे,

केश हैं जैसे बदरा काली,

तुम मीरा सी श्याम की धुन में, जैसे हो गुमसुम दिखते हो,

पृष्ठ ह्रदय के जब मैं खोलूँ, केवल तुम ही तुम दिखते हो।

 

तुम हो शरद सी ऋतु मस्तानी

हिम का घूँघट ओढ़ चली हो,

तुम वसंत में तन पर अपने

सुमन लताएँ मोड़ चली हो,

तुम वर्षा की रिमझिम धारा, और कभी फागुन दिखते हो,

पृष्ठ ह्रदय के जब मैं खोलूँ, केवल तुम ही तुम दिखते हो।

----------------------------------------------------- सुशील जोशी

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by बृजेश नीरज on October 16, 2013 at 10:44am

वाह बहुत सुन्दर आदरणीय! इस बेहतरीन गीत पर आपको हार्दिक बधाई!

Comment by vijay nikore on October 16, 2013 at 7:22am

श्रंगार रस का अति मोहक गीत... सच, कितनी बधाई दूँ.. !

आशा है पढ़ने को ऐसा ही आपसे और मिलेगा।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Sushil.Joshi on October 16, 2013 at 7:12am

आपकी स्नेहिल टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीया महिमा जी...

Comment by MAHIMA SHREE on October 15, 2013 at 11:05pm

बेहद कोमल  सुंदर मधुर गीत ... बहुत -२ हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील जी

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 7:57pm

सुंदर अनुमोदन के लिए आपका अतिश: धन्यवाद आदरणीय अखिलेश जी..... आपकी टिप्पणियाँ मुझे बल प्रदान करती हैं.....

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 7:55pm

आदरणीया शशी जी.... आपकी टिप्पणियों से ही प्रभावित होकर थोड़ा बहुत लिख पाता हूँ..... सादर धन्यवाद आपका....

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 7:54pm

हा...हा..हा..... आदरणीय गिरिराज जी..... आपकी स्नेहिल टिप्पणी कहीं मुझे अहंकारी न बना दे... हा..हा..हा...... बहुत बहुत आभार आपका रचना पसंद कर उस पर अपनी प्रतिक्रिया करने हेतु....

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 7:53pm

गीत को पसंद कर उस पर टिप्पणी करने हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद आदरणीया मीना जी...

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 7:52pm

इस गीत पर आपकी प्रतिक्रिया ने इसके श्रंगार में चार चाँद लगा दिए हैं आदरणीय कपीश जी... आपका अतिश: धन्यवाद...

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 7:50pm

रचना पसंद करने के लिए आपका कोटि-कोटि धन्यवाद आदरणीया गीतिका जी....

कृपया ध्यान दे...

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