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कविता --- मेरे प्रियवर....................... अन्नपूर्णा

मेरे  प्रियवर .............

स्नेह सिक्त हृदय

तुम रहते  प्राण बन

जीवन की अविरल धारा

तुम रहते अठखेलियाँ बन

तुम मेरे प्रियवर.............

मद युक्त नयन

तुम रहते काजल रेख बन

शीश पर चमकते

यों सिंदूरी रेख बन

तुम मेरे प्रियवर.....................

तुमसे ही है जीवन

हर शाम सिंदूरी

फूलों सा महके सिंगार

संग तुम्हारा  अनुपम फुलवारी ॥

मेरे प्रियवर.................

.

अन्नपूर्णा बाजपेई

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

 

 

 

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Comment

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Comment by annapurna bajpai on October 30, 2013 at 5:53pm

आ0 प्राची जी आपका हृदय तल से आभार । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 30, 2013 at 10:50am

प्रिय को समर्पित सुकोमल भाव प्रस्तुति के लिए बढ़ाई आ० अन्नपूर्णा बाजपेई  जी 

Comment by annapurna bajpai on October 28, 2013 at 8:22pm
आ0 विशाल चर्चित जी आपका हार्दिक आभार ।
Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 26, 2013 at 11:02pm

प्रिय के प्रति प्रेम में भावविभोर एवं समर्पण से महकती सराहनीय रचना !!!!

Comment by annapurna bajpai on October 25, 2013 at 6:31pm

आदरणीय शकूर जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 25, 2013 at 6:30pm

आदरणीय बैद्य नाथ जी आपका हार्दिक आभार । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 25, 2013 at 4:48pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी खूबसूरत भावों से सजी इस कविता के लिये बधाई स्वीकार करें

Comment by annapurna bajpai on October 25, 2013 at 1:54pm

आ0 अरुण शर्मा  जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by Saarthi Baidyanath on October 25, 2013 at 1:26pm

सुन्दर व भाव-प्रवण रचना !..महाशया बधाई स्वीकारें !...नमन :)

Comment by annapurna bajpai on October 25, 2013 at 1:16pm

आ0 जितेंद्र जी आपका हार्दिक आभार । 

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