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दीवाली पर एक नवगीत

क्यों रे दीपक
क्यों जलता है,
क्या तुझमें
सपना पलता है...?!

हम भी तो
जलते हैं नित-नित
हम भी तो
गलते हैं नित-नित,
पर तू क्यों रोशन रहता है...?!

हममें भी
श्वासों की बाती
प्राणों को
पीती है जाती,
क्या तुझमें जीवन रहता है...?!

तू जलता
तो उत्सव होता
हम जलते
तो मातम होता,
इतना अंतर क्यों रहता है...?!

तेरे दम
से दीवाली हो
तेरे दम
से खुशहाली हो,
फिर भी तू चुप - चुप रहता है...?!

चल हम भी
तुझसे हो जायें
हम भी जग
रोशन कर जायें,
मन कुछ ऐसा ही करता है...!!

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

- विशाल चर्चित

Views: 860

Comment

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Comment by vijay nikore on October 28, 2013 at 4:37am

 

सुन्दर रचना ..........अच्छी लगी। हार्दिक बधाई।

 

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 27, 2013 at 10:35pm

बैद्य भाई बहुत - बहुत शुक्रिया !!!!

Comment by Saarthi Baidyanath on October 27, 2013 at 9:59pm

बढ़िया भाव सहित ..सुन्दर रचना !

तेरे दम 
से दीवाली हो
तेरे दम 
से खुशहाली हो,
फिर भी तू चुप - चुप रहता है...

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 27, 2013 at 9:50pm

अतेन्द्र जी धन्यवाद !!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 27, 2013 at 9:50pm

बहुत - बहुत शुक्रिया प्रियंका जी !!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 27, 2013 at 9:49pm

धन्यवाद अखिलेश भाई जी !!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 27, 2013 at 9:48pm

आभार लक्ष्मण सर जी !!!

Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on October 27, 2013 at 9:47pm

इस सुन्दर गीत के लिए विशाल भाई आपको सहृदय बधाई अतेन्द्र की तरफ से ...बहुत ही सुन्दर भाव ...क्या कहनें

तू जलता
तो उत्सव होता
हम जलते
तो मातम होता,
इतना अंतर क्यों रहता है...

क्या सोच है आपका विशाल जी .....आपकी सोच को सलाम

Comment by Priyanka singh on October 27, 2013 at 8:53pm

चल हम भी 
तुझसे हो जायें
हम भी जग 
रोशन कर जायें,
मन कुछ ऐसा ही करता है...

वाह वाह बहुत खूब ....सीधे सरल भावयुक्त आपकी रचना ....बहुत खूब ...बधाई आपको ...

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 27, 2013 at 7:42pm

 विशाल चर्चित भाई भावपूर्ण सुंदर गीत की बधाई।

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