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Atendra Kumar Singh "Ravi"
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Atendra Kumar Singh "Ravi"'s Discussions

हिंदी के वर्णमाला का विकास कहाँ हुआ और किसने खोजा.......

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Started Jul 24, 2011

 

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"देख के मासूमियत जब से दिवाना बन गया ! कर दिया घायल खुदी को वो निशाना बन गया !! आज मँहगा प्यार है यूँ हर तरफ देखें यहाँ ! प्यार की लगती है कीमत क्या तमाशा बन गया !! या खुदा दरबार तेरे आज क्या क्या हो रहा ! झूठ के दामन में लिपटा वो मसीहा बन गया…"
Dec 28, 2018
Atendra Kumar Singh "Ravi" and Sheikh Shahzad Usmani are now friends
Nov 18, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
sonebhadra U.P
Native Place
varanasi
Profession
Casual Announcer in A.I.R Obra Sonebhadra, Writer & Student...
About me
I M Open Minded & creative Nature.

Atendra Kumar Singh "Ravi"'s Blog

ग़ज़ल-चादनीं तुम मेरी बनीं हो क्या

दूर है चाँद बंदगी हो क्या

दिल की बस्ती में रौशनी हो क्या 

 

और के ख्वाब को न आने दिये

ख्वाब में ऐसी नौकरी हो क्या 

 

मुड़के देखा हमें न जाते हुये

तल्ख़ इससे भी बेरुखी हो क्या 

 …

Continue

Posted on March 31, 2014 at 6:00pm — 16 Comments

अपने हाथों के लकीरों को बदल जाऊंगा.............

अपने हाथों के लकीरों को बदल जाऊंगा

यूँ लगा है की सितारों पे टहल जाऊंगा ll



जर्रे-जर्रे में इनायत है खुदाया अब तो

तू है दिल में बसा मैं खुद में ही ढल जाऊंगा ll



रो लिया चुपके जरा हस लिया हमनें ऐसे

ज़ख्म तो दिल के दबाकर मैं बहल जाऊंगा ll



प्यार में गम है मिला दिल हो गया ये घायल

ठोकरें खा के मुहब्बत में संभल जाऊंगा ll



है कशिश तीरे नज़र टकरा गयी हमसे जो

इक छुवन से ही जरा उसके मचल जाऊंगा ll



तू खुदा, बंदा मैं हूँ , हाथ जो सर पे रख…

Continue

Posted on February 13, 2014 at 5:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल-चल दिया है छोड़, क्या जुल्म ये काफी नहीं

2122     2122      1222       12

चल दिया है छोड़, क्या जुल्म ये काफी नहीं

==============================

अब हमारी याद भी क्यूँ तुम्हें आती नहीं

चल दिया है छोड़,क्या जुल्म ये काफी नहीं //१//

तू हमारे दिल बसा , इसमें है कैसी खता

हो गया हमसे जुदा याद क्यूँ जाती नहीं  //२//

वो हवायें वो फिजायें बुलाती हैं तुम्हें

आ तो जाओ फिर कोई बात यूँ भाती नहीं //३//

मुडके भी देखा नहीं तुम गये जाने…

Continue

Posted on December 8, 2013 at 9:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल.....खंज़र चुभा किस धार से

2212/2212/2122/212

 दिल में तुम्हारे है जो मुझको बताना प्यार से

यूँ भूल कर हमको भला क्या मिला संसार से

यूँ जानकर रुसवा किया आज महफ़िल में भला 

जो तोड़कर नाता चले क्यूँ भला इस पार से

चुप सी है धड़कन मेरी अब दिल भी है खामोश तो

घायल हुआ दिल मेरा खंज़र चुभा किस धार से

नादान हूँ मैं या कि अहसान उनका है जरा 

वो रोक देते हैं मुझे शर्त कि दीवार से

वो प्यार के मंजर हमें आज भी भूले नहीं

दिल भी…

Continue

Posted on October 22, 2013 at 9:30pm — 22 Comments

Comment Wall (15 comments)

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At 11:21pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

    अतेन्द्र कुमार जी धन्यवाद रचना पढ्ने एवम टिप्पणी के लिये. वो स्त्री रस्ते मे नईहर है अतः मिलने जाने के लिये कह रही है ! वहां पहुंचाने के लिये नही ! पति के साथ कुछ समय नईहर मे बिताना सुखद लगता है. ! दामाद की भी आवभगत होने से उन्हे भी अच्छा लगता है ! बस इसी भाव से मैने लिखा है.

 

At 11:44am on August 15, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:52pm on September 7, 2011, आशीष यादव said…

आपकी रचना को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने पर बधाई|

At 8:34pm on September 5, 2011, Abhinav Arun said…
अतेन्द्र 'रवि' जी ! आप की रचना शौक (झलकी) को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने पर हार्दिक बधाई !!
At 12:36pm on September 5, 2011,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

नाटिका ’शौक’ को विगत माह की सर्वश्रेष्ठ रचना चयनित होने पर अतेन्द्रजी को मेरी हार्दिक बधाई. ..

At 9:23am on September 5, 2011, Admin said…

आदरणीया अतेन्द्र कुमार सिंह "रवि" जी,

सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की रचना शौक (झलकी) को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (Best Creation of the Month) के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है |
इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे,धन्यवाद,
आपका
एडमिन
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:48am on August 18, 2011,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आपको मेरी बधाइयाँ.

परन्तु, मुझे उक्त रचना को लेकर आपके इस व्यक्तिगत संदेश का अर्थ समझ में नहीं आया. आप इन पंक्तियों को वहीं चस्पाँ कर दें, बेहतर होगा.

 

दूसरे, आपका ध्यान आपकी रचना के प्रस्तुतिकरण ढंग में हुए परिवर्तन पर गया होगा. इस पर मनन करें और नाटिका शैली तथा प्रस्तुतिकरण की गुणवत्ता में आवश्यक सुधार करने का प्रयास करें.  देखिये नाटिका के प्रस्तुतिकरण के क्रम में और क्या-क्या परिवर्तन हुए दीखते हैं.

 

धन्यवाद.

At 10:13am on August 15, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 6:53pm on August 12, 2011, Abhinav Arun said…

शुक्रिया अतेन्द्र जी ग़ज़ल आपको पसंद आयी आभारी हूँ !!

At 11:08pm on August 2, 2011, Shanno Aggarwal said…

अतेंद्र जी, इतनी सुंदर तरीके से शुभकामना देने के लिये आपको लाखों धन्यबाद. 

 
 
 

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