For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वो कहते हैं

शब्‍द र्निजीव होते है,

बेजुबान होते है।

वो कहते है,

यह लेखनी से बने,

आकार भर है।

जुबान से निकली,

आवाज भर है।

ना इनकी पहचान है,

ना इनका अस्तिव।

मगर यारो शब्‍द तो शब्‍द हैं,

अक्षरों केा संगठित कर

खुद में समाहित कर,

वाक्‍य बना कर उसे

पहचान देते है।

और खुद गुमनामी के

अँधेरे में खो जाते है।

ये शब्‍द निस्वार्थ सेवा का

एक सच्‍चा उदाहरण है।

एक शब्‍द झकझोर देता है,

मानव मन केा।

लाख छुपा ले हम ,

अपनी चाहत,को

अपनी संवेदना को

अपने विचार को,

पहचान केा,

मगर सब बता देते हैं,

ये शब्‍द ।

अपनो और गैरो की,

पहचान बता देते है,

दिल का चैन,

मन की शांति देते है,

यादो को ताजा कर देते है,

ये शब्‍द।

अपना अस्तित्‍व,

हो, ना हेा

किसी की पहचान बन जाते है,

बैचन  कर देते है।

आँखो में पानी भर देते है,

बीती बाते याद दिलाते दते है

दिल को तड्पा जाते है

सुख दुख में साथ निभाते है।

ये शब्‍द।

ये शब्‍द अपनी अखंड

तुम्‍हारी पहचान है,

ये अपने नही,

आपके लिये जीते है।

आपके सुख से सुखी

गम से गमगीन,

हो जाते है,

ये शब्‍द ।

अपना हर पल बलिदान कर

आपके लिये खो देते है

अपना अस्तिव

ये शब्‍द,

ये शब्‍द,अखंड ये शब्‍द।

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी  

Views: 455

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by annapurna bajpai on October 30, 2013 at 6:41pm

सुंदर रचना के लिए बधाई आपको आ0 अखंड जी । 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 30, 2013 at 10:26am

शब्द पर सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई श्री अखंड भाई 

Comment by Sushil.Joshi on October 29, 2013 at 10:07pm

शब्दों का सुंदर बखान करती हुई इस अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत बधाई आ0 अखंड भाई जी...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 29, 2013 at 5:10pm

आदरणीय अखंड भाई , जीव से निकले शब्द कभी निर्जीव नही होते !!!! आपकी सुन्दर रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई !!!!!

Comment by ram shiromani pathak on October 29, 2013 at 11:14am

 इस सुन्दर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई///सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
3 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
16 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service