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दुन्दुभी क्या? वो बाँसुरी होगी -- ( ग़ज़ल ) गिरिराज भन्डारी

दुन्दुभी क्या? वो बाँसुरी होगी

*******************************

 2122    1212       22

 

काई ज़ज़्बात पर जमी होगी

दूरी ,क्या यूँ ही बन गयी होगी  ?

पूर्ण तो बस ख़ुदा ही होता है

आदमी है तो कुछ कमी होगी

 

जख़्म रिसते रहे हैं मेरे तो

कुछ निशानी भी बन गयी होगी

 

सच को सच आज कह सकें हम सब 

कोई तो एक सरज़मी होगी

 

मैने खोजा बहुत नहीं पाया

छत पे सोचा था चाँदनी होगी

 

क़त्ल करती है माँ ही बच्चे को

सोचिये कैसी बेबसी होगी

 

जिसकी आवाज़ ने मिलाया है

दुन्दुभी क्या? वो बाँसुरी होगी

 

आज तारीकी जितनी गहरी है 

लगता है कल से रोशनी होगी   

 *************

( संशोधित )

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 17, 2013 at 7:58am

आदरणीय वीनस भाई , गलतियाँ सामने लाने के लिये आपका आभारी हूँ , संशोधित कर  फिर से पोस्ट कर देता हूँ । आपका शुक्रिया ॥

Comment by वीनस केसरी on December 17, 2013 at 3:53am

काई ज़ज़्बातों पर जमी होगी

रोज़ ही कुछ कहा सुनी होगी ..
आदरणीय जज़्बा का बहुवचन जज़्बात है .. अब ये जज्बातों क्या लफ्ज़ हुआ ? हैरानी है कि किसी ने नहीं टोका .... जम सुन के कारण ईता दोष भी है .. हालांकि आपकी कई ग़ज़लों में मैंने ईता दोष देखा है ... आप चाहें तो ईता दोष को न मानें ...बहुत लोग इसे नहीं मानते

कुछ निशानी सी बन गयी होगी ... निशान बनने को निशानी कहते हैं ,,, ज़बान के लिहाज से जुमला गलत है

 
ग़ज़ल को और समय दें तो निखर जाए ...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 18, 2013 at 12:33pm
आदरणीया प्राची जी , गज़ल की सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार !!!!!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 18, 2013 at 11:52am

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी 

पूरी ग़ज़ल बहुत सुन्दर हुई है..

इस एक शेर की भाव दशा पर तो ख़ास बधाई लीजिये 

क़त्ल करती है माँ ही बच्चे को

सोचिये कैसी बेबसी होगी

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 15, 2013 at 10:44am

आदरणीय अभिनव अरुण भाई , !!!!! गज़ल की सरहना और हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!!

!!!!!!!स्नेह ऐसे ही बनाये रखे !!!!!!!

Comment by Abhinav Arun on November 15, 2013 at 9:51am

पूर्ण तो बस ख़ुदा ही होता है आदमी है तो कुछ कमी होगी...क्या कहने श्री गिरिराज जी ...बहुत गहरी बातें समाई हैं हर शेर में . इस फलसफे इस अंदाज़ के सदके ! सौ सौ साधुवाद इस सार्थक संदेशपरक ग़ज़ल के लिए आदरणीय !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 15, 2013 at 7:34am

आदरणीय नीलेश भाई ,!!!!!  हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 15, 2013 at 7:25am

पूर्ण तो बस ख़ुदा ही होता है

आदमी है तो कुछ कमी होगी... वाह वाह वाह .. बधाई सर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 14, 2013 at 9:02pm

आदरणीय केवल भाई , गज़ल की सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 14, 2013 at 8:34pm

आ0 भण्डारी भाईजी   खूबसूरत गजल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,

कृपया ध्यान दे...

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