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1-मरणोपरांत

भूख से मरा था
शायद! इसीलिए
मरणोपरांत अखबार में
फ़ोटो छपी है

२-लाभ

आपके हीरे कि अँगूठी से अच्छा तो मेरा
मिट्टी का दीपक है
कम से कम
रात में प्रकाश तो फैलाता है

३-सौदा

आज उसके बच्चे भूखे नहीं सोये
वो कह रहा था
कुछ फर्क नहीं पड़ता
थोड़ा रक्त बेचने पर

४-तृप्ति

भूख शांत हो गयी
जली रोटी थी तो क्या? हुआ
*********************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 704

Comment

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Comment by ram shiromani pathak on December 20, 2013 at 1:44am

बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ जी............  सादर  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 19, 2013 at 11:54pm

पहली क्षणिका की गहन भावदशा प्रभावित करती है. बाकी के तथ्यों में वहीवहीपन अधिक प्रभावी है.

शुभेच्छाएँ

Comment by ram shiromani pathak on December 13, 2013 at 10:40pm

उत्साह वर्धन हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई संदीप जी    …………   सादर  

Comment by ram shiromani pathak on December 13, 2013 at 10:39pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया मीना जी    …………   सादर  

Comment by ram shiromani pathak on December 13, 2013 at 10:38pm

बहुत बहुत आभार राहुल भाई। …………   सादर  

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 13, 2013 at 8:35pm

बहुत सुन्दर राम भाई ............ग़ज़ब ग़ज़ब ग़ज़ब ......बधाई हो बधाई हो बधाई हो

Comment by Meena Pathak on December 13, 2013 at 6:36pm

बहुत ही भावपूर्ण क्षनिकाएं, बधाई आप को 

Comment by ram shiromani pathak on December 13, 2013 at 9:28am

बहुत बहुत आभार भाई जीतेन्द्र जी  ....   सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 13, 2013 at 9:27am

बहुत बहुत आभार आदरणीया वन्दना जी  ....   सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 13, 2013 at 8:55am

तृप्ति भूख शांत हो गयी
जली रोटी थी तो क्या? हुआ..........आत्मसंतुष्टि

बहुत सुंदर रचना, बधाई स्वीकारें आदरणीय राम भाई

कृपया ध्यान दे...

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