For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सूखे पत्तों के ढेर में

उम्मीद का

एक अंकुर फूटा

 

सूखे पत्ते मानो,

लाशें हैं

लाश हारे हुये लोगों की

लाश,

पराधीनता को किस्मत समझ

डर-डर के जीने वालों की

 

वो अंकुर है

भाग्योदय का

कीचड़ में उतर

परजीवियों को

साफ कर

समाज से

बीमारी हटाने वालों का

जो एक ज़र्रा था कल तक

आज

ज़माना उसकी चमक देख रहा है

 

अपनी नन्हीं आँखें खोल

मानो, कह रहा है

उठो

खुद को पहचानो,

खुद को बदलो,

आओ, नये युग की शुरुआत लिखें

 

 -मौलिक व अप्रकाशित

Views: 934

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 6, 2014 at 8:37pm

आदरणीय सौरभ सर आपका बहुत बहुत धन्यवादl अतुकांत के शिल्प को ले कर बहुत सारी बातें साफ नही है आपका मार्गदर्शन अपेक्षित है


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 6, 2014 at 3:23pm

अतुकान्त शैली में हुआ प्रयास अच्छा है. इस कोशिश पर शुभकामनाएँ.

बिम्ब-प्रतीकों को परिभाषित करने से बचें.

शुभेच्छाएँ.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 5, 2014 at 9:01pm

आपका बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गणेशजी स्नेह बनाये रखें


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 5, 2014 at 8:52pm

//

सूखे पत्ते मानो,

लाशें हैं

लाश हारे हुये लोगों की

लाश,

पराधीनता को किस्मत समझ

डर-डर के जीने वालों की//

क्या कहने भाई गज़ब, बहुत ही खूबसूरत ख्याल, और बहुत ही सलीके से शिल्प का सहारा लिया है, अच्छी कविता हुई है, बधाई आदरणीय शिज्जू जी |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 8:02pm

आपका बहुत बहुत शुक्रिया भाई विंध्येश्वरी त्रिपाठी जी

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 4, 2014 at 7:55pm
आदरणीय शिज्जू जी! नये साल में नये युग की शुरुआत करनी ही चाहिये हम सभी को।
बहुत ही सुन्दर कविता।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 2, 2014 at 4:26pm

भाई अरुण जी तारीफ के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 2, 2014 at 4:25pm

आदरणीय लक्ष्मण जी रचना को मान देने के लिये शुक्रिया और नववर्ष की आपको शुभकामनायें

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 2, 2014 at 11:18am

खुद को पहचानो,

खुद को बदलो,

आओ, नये युग की शुरुआत लिखें वाह भाई जी बेहद सुन्दर सन्देश देती रचना खासकर ये पंक्तियाँ अत्यधिक पसंद आईं बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 2, 2014 at 7:13am

आदरणीय  शिज्जू भाई.

सुन्दर रचना के लिए बधाई और साथ ही वर्ष २०१४ का हर दिन आपके लिए शुभ हो यही मंगल कामनाए है

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
3 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
9 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
11 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
11 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service