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गज़ल - जाग उठी सड़कें

जाग उठी सड़कें  उन्हें बस  सच बयानी चाहिए

कह  दो  संसद  से  न  कोई   लंतरानी  चाहिए

 

देख तो ! मैं बिक गया उसकी वफ़ा के नाम पर

ऐ  तिजारत ! अब  तुझे  नज़रें  झुकानी चाहिए

 

मैं  बना  दूँ  अपनी पेशानी पे सजदे  की लकीर

तू  बता तुझको  दिलों पर  हुक्मरानी  चाहिए ?

 

धूप  में जलना  पड़ेगा फिर सुबह से शाम तक

जिद  है बच्चों  की उन्हें  कुछ जाफरानी चाहिए

 

प्यार है तो आ मेरे माथे पर अपना नाम लिख

जिक्र  जब  मेरा  हो  तेरी  बात  आनी  चाहिए

 

कर  खसारा  मैं  भरे  बाज़ार  से  उठने को  हूँ

कह   रहे   हैं   लोग   थोड़ी   बेइमानी  चाहिए

 

मैं भी चुप हूँ तू भी तन्हा सोच मत पत्थर उठा

तु  भी  खुश, मेरे  लहू  को  भी  रवानी  चाहिए
.
.

अरुन श्री !

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 997

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Comment by Arun Sri on January 17, 2014 at 12:59pm

धन्यवाद ! :-))))))


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 14, 2014 at 6:55pm

बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है आ० अरुण श्रीवास्तव जी 

हर शेर पर बधाई स्वीकार कीजिये 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 9, 2014 at 1:31am

इस नायाब गज़ल को मैं दिल से स्वीकार करता हूँ.  हर शेर पर बार-बार दाद है. बार-बार दाद.. दिल खोल कर..

बहुत खूब !

Comment by Arun Sri on January 8, 2014 at 10:25am

बहुत धन्यवाद मीना पाठक मैम !

Comment by Arun Sri on January 8, 2014 at 10:24am

आदरणीय   योगराज प्रभाकर सर , आपकी टिपण्णी ने हौसला बढ़ाया ! सादर धन्यवाद !

Comment by Meena Pathak on January 7, 2014 at 2:00pm

क्या बात है ,,  बहुत खूब 

ढेरों दाद क़ुबूल कीजिये आदरणीय अरुन जी | सादर 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 7, 2014 at 12:28pm

//धूप  में जलना  पड़ेगा फिर सुबह से शाम तक
जिद  है बच्चों  की उन्हें  कुछ जाफरानी चाहिए// हासिल-ए-ग़ज़ल शेअर।    

एक एक शेअर नगीने की तरह जड़ा है भाई अरुण जी. हर शेअर एक अलग कहानी बयान कर रहा है. इस उच्च स्तर की ग़ज़ल पढ़ कर रूह को सुकून पहुंचा, मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Arun Sri on January 7, 2014 at 11:16am

ajay sharma जी , गज़ल को अतिशय मान दिया आपने ! विशेष धन्यवाद आपको !

Comment by Arun Sri on January 7, 2014 at 11:15am

आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद जो आप सब ने इस नौसिखिए की गज़ल को सराहा , हौसला बढ़ाया !

Comment by बृजेश नीरज on January 6, 2014 at 10:25pm

वाह! बहुत सुन्दर! लाजवाब! आपको बहुत बहुत बधाई भाई जी!

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