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कभी जीवन में अपने कुछ दुखद से पल भी आते हैं

1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 2 2   1 2 2 2


कभी जीवन में अपने कुछ दुखद से पल भी आते हैं
सभी अपने हमेशा के लिए तब छोड़ जाते हैं /


समय अपना बुरा आया,तमस भी साथ ले आया 

करीबी जो रहे अपने वही नजरें चुराते हैं /


किसे फुर्सत हमें देखे हमारा हाल वो जानें 
हमें रुसवाइओं में तन्हा अक्सर छोड़ जाते हैं /


मिले ढूंढे नहीं कोई सहारा बन सके जो तब
मुसीबत में कहाँ अब लोग यूँ रिश्ते निभाते हैं /


भला कर तू भला होगा बुरा मत सोचना मन में
रवायत यह है दुनिया की करम ही साथ जाते हैं /

 

कहाँ वश मौत पे अपना नहीं जीवन पे वश अपना 
ये खेला मौत जीवन का तो भगवन ही रचाते हैं/

मौलिक व् अप्रकाशित.............

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Comment by S. C. Brahmachari on January 6, 2014 at 10:50pm
भला कर तू भला होगा बुरा मत सोचना मन मे
रवायत यह है दुनिया की करम ही साथ जाते हैं । .... उत्कृष्ट प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें । गीता का ज्ञान भी तो यही है!
Comment by Abhinav Arun on January 6, 2014 at 7:57pm
गहन संवेदनाओं को शब्द मिले हैं शानदार रचना सृजन हेतु हार्दिक बधाई और शुभकामनायें आदरणीया !!
Comment by coontee mukerji on January 6, 2014 at 5:39pm


भला कर तू भला होगा बुरा मत सोचना मन में
रवायत यह है दुनिया की करम ही साथ जाते हैं /

 

कहाँ वश मौत पे अपना नहीं जीवन पे वश अपना 
ये खेला मौत जीवन का तो भगवन ही रचाते हैं/.......बहुत सुंदर बात कही आपने सरिता जी. हार्दिक बधाई.

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2014 at 5:13pm

आदरणीया सरिता जी,,,,,बहुत ही उम्दा लेखन,,,,,,बहुत बहुत बधाई आपको,,,

Comment by Sarita Bhatia on January 6, 2014 at 9:43am

आदरणीय गिरिराज जी हार्दिक आभार मार्गदर्शन करते रहें 

Comment by Sarita Bhatia on January 6, 2014 at 9:42am

आदरणीय योगराज sir आप सभी का आशीर्वाद एवं स्नेह बना रहे 

Comment by Sarita Bhatia on January 6, 2014 at 9:39am

शुक्रिया शिज्जू जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 6, 2014 at 7:43am

आदरणीया सरिता जी , लाजवाब गज़ल कही है , सभी शे र बहुत अच्छे लगे  ॥ आपको अनेकों हार्दिक बधाइयाँ ॥


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 5, 2014 at 10:03pm

यह ये दर्द आपका सम्बल बने ऐसी मेरी कामना है प्रिय सरिया भाटिया जी. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 5, 2014 at 9:17pm

आदरणीया सरिता जी बेहतरीन ग़ज़ल, अशआर मग़्मूम लगते हैं दिल को छू गये दिली दाद कुबूल करें

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