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मदिरा सेवन जो करे, तन मन करते खाक ।
मान सम्मान बेचकर, बोल रहे बेबाक ।।

धर्म कर्म जाया करे, करते मदिरा पान ।
बीबी बच्चें रो रहे, देखो खोटी शान ।।

सुख दुख का साथी कहे, मदिरा को सम्मान ।
सुख में दुख पैदा करे, उसे कहां है भान ।।

पार्टी सार्टी है करे, जो हैं अप टू डेट ।
बाटली साटली रखे, कुछ करते अपसेट ।।

गरीब अमीर दास है, मदिरा है भगवान ।
वंदन करते शाम को, लगा रहे जी जान ।।

----------------------------------------------

मौलिक अप्रकाशित

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Comment

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Comment by रमेश कुमार चौहान on February 7, 2014 at 8:04pm

श्रद्वेय सौरभजी, यहां मै विशेष शब्द मानकर 121 की वर्जना से छूट लेने का दुस्साहस कर बैठा । क्षमा चाहता हॅू, आप सदैव स्नेह बनाये रखियेगा । सादर आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 6, 2014 at 3:30am

प्रयास के लिए धन्यवाद भाई रमेशजी..

पता नहीं क्यों आप छंदों के मूलभूत नियमॊं क्यों इतने हल्के से लेते हैं.

पार्टी सार्टी है करे, जो हैं अप टू डेट ।
बाटली साटली रखे, कुछ करते अपसेट ।।

गरीब अमीर दास है, मदिरा है भगवान ।
वंदन करते शाम को, लगा रहे जी जान ।।...  

दोनों दोहों में रेखांकित शब्द-समूह दोहा छंद के प्रति आपकी भयंकर लापरवाही का द्योतक है. वह भी तब, जब एक छंदोत्सव पिछले माह दोहा छंद पर आधारित आोजित हुआ था और छंद के मूलभूत नियम साझा किये गये थे.

विश्वास है, आप उपरोक्त बातों को अन्यथा नहीं लेंगे.

सादर

Comment by रमेश कुमार चौहान on February 4, 2014 at 8:50pm

आप सभी को सादर धन्यवाद


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 4, 2014 at 6:35pm

आदरणीय रमेश भाई , दोहों के भाव और सन्देश दोनो बहुत अच्छे हैं , आपको बधाइयाँ ॥ गेयता मे कमी लग रही है ॥

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on February 4, 2014 at 11:55am

अच्छी दोहावली , हार्दिक बधाई । 

Comment by coontee mukerji on February 4, 2014 at 3:11am

क्या खूब लिखा है मदिरापान पर. रमेश जी. बधाई. सादर

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 3, 2014 at 9:57pm

बहुत सार्थक सन्देशप्रद दोहावली, बधाई आदरणीय रमेश जी

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