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मधुमास दोहावली

शुक्ल पंचमी माघ से ,शुरू शरद का अंत
पवन बसंती है चली, आया नवल बसंत /


ले आया मधुमास है, चंचल मस्त फुहार
पीली चादर ओढ़ के, धरा करे शृंगार /


रात सुहानी हो गई उजली है अब भोर
डाली डाली फूल हैं ,हरियाली चहुँ ओर /


निर्मल अम्बर है हुआ, पाया धरा निखार
जर्रे जर्रे में बसा , कुदरत में है प्यार /


रंग बिरंगी तितलियाँ , मन में भरें उमंग
प्यार हिलोरें ले रहा , अब प्रीतम के संग /


पेड़ आम के बौर से, इतरायें हैं आज
मन को है भाने लगी, कोयल की आवाज /

............मौलिक व अप्रकाशित .......

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Comment

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Comment by Sarita Bhatia on February 10, 2014 at 9:10pm

आदरणीय सौरभ sir आपकी प्रतिक्रिया से अपनी गलतिओं को सुधारने का मौका मिलता है ,कृपया स्नेह बनाये रखें |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 6, 2014 at 4:34pm

बसंत को केन्द्र में रख कर हुई इस अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ. आदरणीया

शुभ-शुभ

Comment by Sarita Bhatia on February 6, 2014 at 10:25am

शुक्रिया अन्नपूर्णा जी 

Comment by annapurna bajpai on February 6, 2014 at 1:53am

बहुत सुंदर बासन्ती दोहवली , बहुत बधाई आपको आ0 सरिता जी । 

Comment by Sarita Bhatia on February 5, 2014 at 1:30pm

जितेन्द्र  भाई शुक्रिया 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 4, 2014 at 11:19pm

 बसंत ऋतू पर बहुत सुंदर दोहावली, हार्दिक बधाई आदरणीया सरिता जी

Comment by Sarita Bhatia on February 4, 2014 at 4:50pm

आदरणीय अनिल जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on February 4, 2014 at 4:49pm

आदरणीय अखिलेश जी उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on February 4, 2014 at 4:49pm

कुन्ती दीदी हार्दिक आभार 

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 11:39am

बशंत ऋतू के आगमन का सुन्दर अभिव्यक्ति.....................

कृपया ध्यान दे...

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