For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लो .... 

ये क्या मौसम बदलते ही 

तुमने रिश्तों का स्वेटर 

खोल दिया ... 

एक एक फंदे 

जो तुमने चढ़ाये थे 

इतने जतन से 

अचानक ही 

उन्हे उतार दिया .... 

इतने जल्दी तुम 

भी बदल गए 

इस मौसम की तरह 

चलो .... 

ऐसा करना 

मेरी यादों की सलाईयों को 

सहेज कर रख लेना 

फिर कभी ठंड आएगी 

और उस सलाईयों 

पर अहसासों के ऊन से 

फिर रिश्तों का स्वेटर 

बना लेना ... 

किसी अपने के लिए

रिश्तों के लिए 

नातों के लिए.... 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 573

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 4, 2014 at 12:49am

भावुक कॉड छू रही रचना हुई है.

वैसे एक बात स्पष्ट हुई, आपको स्वेटर के बिने जाने का ढब मालूम है. अच्छा लगा.

शुभ-शुभ

Comment by shashi purwar on February 11, 2014 at 11:07pm

बहुत सुन्दर रचना है रिश्तो की गर्माहट में जब यह पल अवतरित होते है तो फंदे उधड़ते चले जाते है और उन फंडो को सहेजना भी हूनह का कार्य है , रचना में  रचनाकार ने बखूबी अपनी बात कही है , और प्राची जी से सहमत हूँ उस की  जगह उन सलाइयों होना चाहिए , एक बात मेरे जहन में भी अटक गयी कि। ……… रिश्तो को सहेजते सहेजते यह कहाँ से आ गया

बना लेना ... 

किसी अपने के लिए

रिश्तों के लिए 

नातों के लिए....          

……। जैसे यहाँ से नया पड़ाव शुरू हो गया :) वैसे रचना बहुत सुन्दर लगी हार्दिक बधाई आपको

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 11, 2014 at 9:52pm

मेरी यादों की सलाईयों को 

सहेज कर रख लेना 

फिर कभी ठंड आएगी 

और उस सलाईयों 

पर अहसासों के ऊन से 

फिर रिश्तों का स्वेटर 

बना लेना ... 

किसी अपने के लिए

रिश्तों के लिए 

नातों के लिए...............बहुत सुंदर

बधाई स्वीकारें आदरणीय आमोद जी

Comment by MAHIMA SHREE on February 11, 2014 at 9:18pm

बहुत ही खूबसूरत अभिवयक्ति हार्दिक बधाई आपको /सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 11, 2014 at 6:50pm

रिश्तों की गर्माहट बदलते मौसम की तरह जब फंदा फंदा उधड़ती एहसास खोने लगे..तब एक संयत इकाई दूसरी को भविष्य के लिए यही कह सकती है..की यादों को संजो कर फिर नए सिरे से एहसासों के ताने बाने बुनना.... लेकिन किसी और रिश्ते के लिए ? ऐसा क्यों? यदि ऐसा तो उस इकाई की यादों की सिलाइयों पर क्यों ? हर रिश्ता अपने ताने बाने स्वयं ही बुनता है.. किसी दुसरे की यादों पर नए रिश्ते का ताना बाना-यहाँ थोड़ी सी तार्किकता की कमी महसूस हुई..

दूसरा ,

और उस सलाईयों .................उस तो एकवचन संज्ञा के लिए प्रयोग होगा , यहाँ 'उन' होना चाहिए क्योंकि सिलाई नहीं सिलाइयाँ है 

पर अहसासों के ऊन से

तीसरी बात, 

अंत थोड़ा और साधा जा सकता था शाब्दिकता के स्तर पर ..

कुल मिला कर एहसासों  से गुज़रना अच्छा लगा..

हार्दिक बधाई इस रचना पर आ० आमोद कुमार श्रीवास्तव जी  

Comment by रमेश कुमार चौहान on February 10, 2014 at 9:06pm

मेरी यादों की सलाईयों को 

सहेज कर रख लेना 

फिर कभी ठंड आएगी 

और उस सलाईयों 

पर अहसासों के ऊन से 

फिर रिश्तों का स्वेटर 

बना लेना ...                                                            बहुत ही सुंदर

बधाई बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 10, 2014 at 6:19pm

आदरणीय , सुन्दर अभिव्यक्ति के लिये बधाई ॥

Comment by coontee mukerji on February 10, 2014 at 3:46pm

ऐसा करना 

मेरी यादों की सलाईयों को 

सहेज कर रख लेना 

फिर कभी ठंड आएगी 

और उस सलाईयों 

पर अहसासों के ऊन से 

फिर रिश्तों का स्वेटर 

बना लेना ... 

किसी अपने के लिए

रिश्तों के लिए 

नातों के लिए.... ...बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है....सधुवाद.

Comment by Meena Pathak on February 10, 2014 at 2:51pm

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ..सादर बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on February 10, 2014 at 1:30pm

वाह क्या कहने आदरणीय आमोद जी बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति बहुत बहुत बधाई आपको.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
5 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service