For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ कह-मुकरियाँ ..............डॉ० प्राची

क़दमों में दे बहकी थिरकन

महकी नम सी चंचल सिहरन  

बाँहों भर ले, रच कर साजिश 

क्या सखि साजन? न सखि बारिश 

हर पल उसने साथ निभाया 

संग चले बन कर हम साया 

रंग रसिक नें उमर लजाई 

क्या सखि साजन? न सखि डाई

चाहे मीठे चाहे खारे 

राज़ पता हैं उसको सारे 

खोल न डाले राज़, हाय री ! 

क्या सखि साजन? न सखि डायरी 

उसने सारे बंध सँजोए

अंक समेटे प्रेम पिरोए 

ज़िंदा है यादों से हरदम 

क्या सखि साजन? न सखि एल्बम 

आँसू देखे, झट गल जाए 

रख लूँ उसको नयन बसाए 

रूप निखारे कंचन कंचन 

क्या सखि साजन? न सखि अंजन 

 

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 1302

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on February 24, 2014 at 9:19pm

आदरणीया डॉ प्राची जी एक से बढ़कर एक कह मुकरियाँ ... मन भावन ...बधाई
भ्रमर ५


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 23, 2014 at 7:42pm

आ० डॉ० आशुतोष मिश्रा जी 

कह मुकरियाँ की प्रस्तुति आपको पसंद आयी यह जान बहुत खुशी हुई ...

सराहना के लिए सादर धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 23, 2014 at 7:39pm

आ० अखिलेश श्रीवास्तव जी 

कहमुकरियाँ आपको पसंद आयीं यह जान अच्छा लगा ... लेकिन भाई जी ये विधा किसी भी तरह पहेली के समकक्ष नहीं... क्योंकि पहेली कभी उत्तर अपने में नहीं समेटे होती , साथ ही कह मुकरियाँ सिर्फ दो सखियों की बातचीत को अभिव्यक्त करती हैं जिसमें एक सहेली बद्ख़याली में (या अपनी ही धुन में ) अपने प्रिय के बारे में कुछ बता जाती है , और दूसरी सखि के पूछने पर मुकर जाती है...कि नहीं मैं तो किसी और चीज़ के बारे में बात कर रही थी.

और ये कह्मुकरियाँ यदि आप बच्चों के समूह में पहेली की तरह खेली जा सकने की विधा समझते हैं तो ये बहुत ही आश्चर्य जनक है क्योंकि निश्चय ही कह्मुकारियों की विषयवस्तु व प्रस्तुतीकरण का तरीका बच्चों के लिए तो नहीं ही है.

सादर.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 23, 2014 at 7:23pm

आदरणीया प्राची जी ..आपके बैबिध्य पूर्ण साहित्य श्रजन के एक और पहलू से रूबरू होने का  मौका मिला ..बहुत ही शानदार कह्मुकरियाँ ..सभी एक से बढाकर एक .तहे दिल बधाई स्वीकर करें सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 23, 2014 at 12:21pm

आदरणीय मुख्य प्रबंधक महोदय 

कह मुकरी विधा पर यह प्रस्तुति आपको पसंद आयी और आपकी भरपूर सराहना मिली... यह अनुमोदन इस प्रयास के प्रति आश्वस्ति दे रहा है 

आपका हार्दिक धन्यवाद 

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 23, 2014 at 12:15pm

कह्मुकरियाँ आपको पसंद आयीं ,जान मुझे बहुत अच्छा लगा ...सादर धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 23, 2014 at 12:14pm

कहमुकरियों तक दोबारा आने के लिए धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी, आ० अशोक कुमार रक्ताले जी 

सादर.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 23, 2014 at 9:59am

आदरणीया प्राची जी, कहमुकरी विधा पर बहुत ही जबरदस्त पकड़ बनी है, सभी कहमुकारियां एक से बढ़कर एक हुई हैं, अंतिम पक्ति से पूर्व तक यही भान होता है कि बात साजन की हो रही है और यही इसकी खूबसूरती भी है, बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर। 

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 22, 2014 at 11:47pm

चाहे मीठे चाहे खारे 

राज़ पता हैं उसको सारे 

खोल न डाले राज़, हाय री ! 

क्या सखि साजन? न सखि डायरी ............वाह ! बहुत सुन्दर कह मुकरी हो गया है आदरणीया डॉ. प्राची सिंह जी.पुनः एक बार सभी लाजवाब कह-मुकरी छंदों के लिए सादर बधाई स्वीकारें.

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on February 22, 2014 at 10:26pm

आदरणीय योगराज भाई,

अन्यथा न लें। मैं सच कह रहा हूँ , बचपन में हम बच्चों से दादी , नानी और माँ भी समूह में पहेली के रूप में कविता की  कुछ पंक्तियाँ कहती जिसका एक ही उत्तर होता था, । हाँ उसे मुकरियाँ  नहीं , हम कुछ और  कहते थे । प्रायः यह रात्रि  भोजन के पूर्व खेला जाता था। इसी उद्देश्य से मैंने कुछ मुकरियों की कापी भी की है ।

............. सादर  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
46 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
yesterday
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Monday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service