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गीत कोई गा रहा है आज मेरे मौन में ( ग़ज़ल ) गिरिराज भंडारी

2122    2122    2122    212

कौन चुपके आ रहा है आज मेरे मौन में

गीत कोई गा रहा है  आज मेरे  मौन में

 

वाक़िया जिसकी वज़ह से दूरियाँ बढ़ने लगीं 

बस वही समझा रहा है ,आज मेरे मौन में

 

ख़्वाब कोई अब पुराना टूट जाने के लिये

देख फिर इतरा रहा है , आज मेरे मौन में

 

अश्क़ मेरी आखों से जो बह नहीं पाया कभी

रो रहा , पछता रहा है ,आज मेरे मौन में

 

रास्ता छोड़ा अगर तो मै न फिर वापस गया

खूब याद आता रहा है  आज मेरे मौन में

 

यार मेरे अब न हँसने की कोई बातें करो

दर्द  कोई खा रहा है , आज मेरे मौन मे

 

ज़िन्दगी की डोर का इक छोर हाथ आया ही था

फिर कोई उलझा रहा है ,आज मेरे मौन में

**************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by gumnaam pithoragarhi on February 22, 2014 at 11:32pm

यार मेरे अब न हँसने की कोई बातें करो

दर्द  कोई खा रहा है , आज मेरे मौन मे

ज़िन्दगी की डोर का इक छोर हाथ आया ही था

फिर कोई उलझा रहा है ,आज मेरे मौन में

wah wah sahab khoob badhai aapko,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 22, 2014 at 10:35pm

यार मेरे अब न हँसने की कोई बातें करो

दर्द  कोई खा रहा है , आज मेरे मौन मे........बहुत खूब,

सुंदर गजल बधाई आदरणीय गिरिराज जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 22, 2014 at 9:32pm

आदरणीय बड़े भाई अखिलेश जी , ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on February 22, 2014 at 9:29pm

छोटे भाई गिरिराज,

अच्छी ग़ज़ल की हार्दिक बधाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 22, 2014 at 8:41pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी , आपकी दाद दिल से कुबूल करता हूँ , गज़ल की सराहना के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 22, 2014 at 8:39pm

आदरणीय राम शिरोमणी भाई , गज़ल के सराहना के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 22, 2014 at 8:38pm

आदरणीय  श्याम नारायण भाई , ग़ज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिये आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 22, 2014 at 7:52pm

ख़्वाब कोई अब पुराना टूट जाने के लिये

देख फिर इतरा रहा है , आज मेरे मौन में----क्या बात है ....

ज़िन्दगी की डोर का इक छोर हाथ आया ही था

फिर कोई उलझा रहा है ,आज मेरे मौन में-----शानदार ...बहुत बढ़िया ग़ज़ल दाद कबूलें 

 

 

Comment by ram shiromani pathak on February 22, 2014 at 4:25pm

यार मेरे अब न हँसने की कोई बातें करो

दर्द  कोई खा रहा है , आज मेरे मौन मे////////बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल  आदरणीय गिरिराज जी //सादर

Comment by Shyam Narain Verma on February 22, 2014 at 3:49pm
"क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को "

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