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एक मासूम कली
भंवरे के स्पर्श से
खिल उठी
मुस्काई
हर्षाई
लिया पुष्प सा रूप
एक दिन
भंवरा उसका खो गया
पुष्प का हाल बुरा हो गया
उदास बेचैन पुष्प को चाहिए था
थोड़ा प्यार
थोड़ा दुलार
थोड़ी हंसी
थोड़ी हमदर्दी
जो ना मिल पाई


फिर एक दिन
आया एक भंवरा
जो उसके आसपास मंडराता
उसे तराने सुनाता
उसे खिलखिलाना सिखाता
पुष्प हुआ पुनर्जीवित
उसके प्यार से
दुलार से
पर
चिंतित हर क्षण
ना खो दे
अपनी खुद्दारी
आत्मसम्मान
अपना अस्तित्व
क्योंकि
यह दुनिया है स्वार्थी
यहाँ कुछ भी पाने के लिए
कुछ खोना पड़ता है
उस ने सोचा
अगर कुछ खोना है तो
खोना होगा अपना वजूद
या तो वो होगा
किसी मंदिर
किसी शहीद की
समाधि पर अर्पित
फिर क्यों करे
वो
अपना आत्मसम्मान
अपनी खुद्दारी समर्पित

अगर मिले कोई ऐसा पुष्प
उसे
अपने प्यार से
दुलार से

सींचना हर दम
नहीं करना उसे मजबूर
खोने के लिए उसका वजूद

.....................................

मौलिक व अप्रकाशित 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 10, 2014 at 10:16am

भँवरे व पुष्प के इंगित से सामाज में वैयक्तिक पारस्परिक समझ के कुछ विशिष्ट बिंदु साँझा करने की चेष्टा हुई है. 

शुभकामनाएं 

Comment by Maheshwari Kaneri on March 4, 2014 at 7:10pm

बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on March 4, 2014 at 4:06pm

आदरणीया सरिताजी ,

अच्छी कविता, सुंदर भाव , हार्दिक बधाई

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 4, 2014 at 10:10am

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति के लिए बधाई आदरणीया सरिता भाटिया जी 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:10pm

आदरणीया मीना जी रचना पसंद करने के लिए शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:09pm

आदरणीय जितेन्द्र जी शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:07pm

आदरणीया ब्रिजेश जी उसाह बढ़ाते रहें 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:06pm

आदरणीय कल्पना मिश्रा जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:06pm

आदरणीया कल्पना दी हौंसला बढ़ाने के लिए शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:05pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी हार्दिक आभार 

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