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शिवरात्रि दोहावली

उत्सव भारत देश के ,करें सभी हम गर्व
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी , महाशिवरात्रि पर्व /


फाल्गुन में शिवरात का होता पर्व विशेष
रंगों भरी फुहार से मिटाओ गिले द्वेष /


मध्यरात अवतरित हो धरा रूप सारंग
गले में सर्प हार औ रमे भस्म से अंग/


रूद्र रूप को देख के भर लो ह्रदय उमंग
शिव शक्ति का मिलनदिवस मनाओ प्रेम संग /


सदा ही मिले आपको शिव का आशीर्वाद
शिव के नित उपवास से मिले दुआ प्रसाद /


धतूरे बेलपत्र से, करना कर्म विशेष
महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामना अशेष /

..................................................

..........मौलिक व अप्रकाशित.............

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 23, 2014 at 12:40am

दोहों पर नियमावलियाँ साझा हो चुकी हैं और उनपर बहुत बातें हुई हैं, रचनाओ के क्रम में भी और मासिक आयोजनों में भी. उचित होता उन संदर्भों में रचनाकर्म होता. मैं कथ्य पर नहीं शिल्प पर बातें कररहा हूँ.

सादर

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:17pm

आदरणीय मीना जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:17pm

आदरणीय अखिलेश जी रचना सराहने और सुझाव बताने के लिए हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:15pm

आदरणीय गिरिराज जी हार्दिक आभार ...सादर 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:15pm

आदरणीय ब्रिजेश जी हार्दिक आभार मार्गदर्शन करते रहें 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:14pm

आदरणीय लक्ष्मण जी हार्दिक आभार उत्साह बढ़ाते रहें 

Comment by Sarita Bhatia on March 3, 2014 at 4:13pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी शुक्रिया 

Comment by Meena Pathak on March 3, 2014 at 9:40am
Bahut sundar dohe...Badhai aap ko
Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on March 2, 2014 at 1:21pm

आदरणीया सरिता जी ,

सुंदर दोहे। हार्दिक बधाई।

रंगों भरी फुहार से मिटाओ गिले द्वेष / / रंगों भरी फुहार से मिटे आपस के द्वेष /


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 2, 2014 at 9:17am

आदरणीया सरिता जी , शिव रात्रि पर सामयिक दोहावली के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

कृपया ध्यान दे...

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