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कुछ चुनावी दोहे-लक्ष्मण लडीवाला

पहन मुखौटा घूमते, आया पास चुनाव,

खेती बो विश्वास की, तापे खूब अलाव । 

 

छलियाँ बनकर लूटने, करे प्रेम की बात,

सबकी बाते मानते,  दिन हो चाहे रात ।

 

मीठा मंतर मारते, मन में रखते खोट,

बंजर को उर्वर कहे, लेने इनको वोट । 

 

पाखण्डी कुछ आ गए, देख हमारे गाँव,

आकर लूटे  कारवाँ,  बोझिल से है पाँव ।

 

देख हवा के रूख को, झट पलटी खा जाय, 

अपने दल को छोड़कर, दूजे दल में जाय |

 

होड़ लगी है मंच पर, फिसला करे जुबान,

हर दल करते घोषणा,हमको लगे समान |

 

छल-प्रपंच से पा रहे, जनता का विश्वास,

जागरूक जनता हुई, आया होश हवास ।

 

पुण्य मिलेगा आपको, करिये तो मतदान, 

देश भक्त इंसान को, पहले ले पहचान |

 

बिन लालच के आपको,करनी है पहचान  

मत की कीमत जानले, तब करना मतदान |

 

सोच समझ कर वोट दे, बिना हुए भयभीत, 

प्रत्यासी को जानले, कैसा रहा अतीत !!

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 11, 2014 at 7:34pm

सदा की तरह प्रोत्साहित करती आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया से संतुष्टि प्रदान करने के लिए आपका हार्दिक आभार आद.राजेश कुमारी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 11, 2014 at 11:43am

बहुत बढ़िया सम सामयिक जाग्रत करते दोहे ,बहुत- बहुत बधाई आ० लक्ष्मण जी आपको| आपका छंदों पर सतत प्रयास रंग ला रहा है जय माँ शारदे  

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 11, 2014 at 10:25am

हार्दिक आभार आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेयी जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 11, 2014 at 10:24am

चुनावी दोहे पसंद करने के लिए आपका आभार श्री विशाल चर्चित जी 

Comment by annapurna bajpai on April 10, 2014 at 10:26pm

वाह !! आ0 लड़ी वाला जी क्या खूब दोहे रचे है , बहुत सुंदर , बधाई आपको । 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 10, 2014 at 10:05am

उम्मीदवारों के चरित्र को द्रष्टिगत रख अपने वोट का सही रूप से और अवश्य उपयोग करना हमारा अधिकार भी और 

कर्तव्य भी है | इस विचार से रचित दोहों को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री विजय मिश्र जी और श्री 

गिरिराज भंडारी जी 

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on April 9, 2014 at 11:27pm

वाह - वाह........ सभी दोहे सुन्दर और सराहनीय चुनावी रंगों में रँगे !!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2014 at 6:53pm

आदरणीय , लक्ष्मण भाई , बहुत सुन्दर सटीक चुनावी दोहावली की रचना की है , आपको हार्दिक बधाई ॥

Comment by विजय मिश्र on April 9, 2014 at 5:31pm
आजकी आवोहवा और चुनावी मौसम पर नेता चरित्र को सुंदर उजागर किया |पृष्ठभूमि में सुंदर सोंच के लिए हार्दिक आभार लक्ष्मणजी |
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 9, 2014 at 11:38am

दोहे पसंद करने के लिए आभार, श्री जितेन्द्र "गीत" जी और श्री अखेलेश भाई  | आशा है सभी पाठक अपने वोट का सही उपयोग कर अपना कर्तव्य निभायेंगे |

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