For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राजरानी के नवासे आप हैं - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

2122        2122     2122      212


जानता  हूँ  देह   के  बेलौस  प्यासे  आप  हैं
किन्तु जनता की नजर में संत खासे आप हैं

*
खुशमिजाजी आप की सन्देश देती और कुछ
लोग कहते  यूँ बहुत पीडि़त  जरा से  आप है

*
राह में उगते  बबूलों  को  तुम्हीं  सीचा  किये
किसलिए  फिर दर्द  पर  मेरे  रुआँसे आप हैं

*
आपका रुतवा सियासत में है केवल इसलिए
देश   कहता  राजरानी  के  नवासे  आप   हैं

*
कह रहे मुझको तमाशेबाज , तुम भी खूब हो
पर हकीकत  रोज करते  तो तमाशे  आप हैं

*
जानते हो  खुद के  बारे भाग दसवाँ भी नहीं
और  मेरी फितरतों के  सौ खुलासे  आप  हैं

रचना मौलिक और अप्रकाशित

Views: 892

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 11, 2014 at 11:12pm

राह में उगते  बबूलों  को  तुम्हीं  सीचा  किये
किसलिए  फिर दर्द  पर  मेरे  रुआँसे आप हैं............वाह! बहुत खूब

कह रहे मुझको तमाशेबाज , तुम भी खूब हो
पर हकीकत  रोज करते  तो तमाशे  आप हैं............वाह! क्या बात कही 

बहुत खुबसूरत गजल कही, हर एक शेर सच की  कटुता के शीर्ष पर है. हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय लक्ष्मण जी

 

Comment by Meena Pathak on April 11, 2014 at 7:35pm

क्या बात है ,,, बहुत खूब ... बधाई आप को ढेरों | सादर 

Comment by कल्पना रामानी on April 11, 2014 at 7:31pm

हर शेर बेहतरीन है, आदरणीय लक्ष्मण जी, बहुत बहुत बधाई आपको। शिज्जु जी के बताए शेर के अलावा तीसरे शेर में 'रूआँसे'शब्द पर भी गौर कीजिएगा/सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 11, 2014 at 3:54pm

आदरणीय लक्ष्मण जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है सारे अशआर अच्छे लगे। खासतौर पर मतले में आपने बेहतरीन सामयिक शेर निकाला है।
एक जगह मैं अटक गया पाँचवा शेर, वैसे तो बहुत अच्छी बात कही आपने शिल्प के लिहाज से भी खूबसूरत और स्पष्ट है मगर इस ग़ज़ल का हिस्सा बनने के बाद "शे" हर्फे कवाफी से ऐब बन रहा है।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service