For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता -

शरीर में चुभे हुए काँटे

जो शरीर को छलनी करते हैं;

वह टीस 

जो दिल की धड़कन

साँसों को निस्तेज करती है

 

यह तुम्हें आनंद नहीं देगी

प्रेम का कोरा आलाप नहीं यह

वासना में लिपटे शब्दों का राग नहीं

छद्म चिंताओं का दस्तावेज़ नहीं

इसे सुनकर झूमोगे नहीं

 

यह तुम्हें गुदगुदाएगी नहीं

सीधे चोट करेगी दिमाग पर

तड़प उठोगे

यही उद्देश्य है कविता का

 

रात के स्याह-ताल पर 

नृत्य करने वाले नर-पिशाचों के लिए

नहीं होती कविता

 

कविता पैदा करती है

जिंदा लोगों में झुरझुरी

एक सिहरन!

           - बृजेश नीरज 

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 556

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on May 6, 2014 at 6:20pm

आदरणीय बृजेश जी
जितनी तारीफ़ की जाए कम है..

यह तुम्हें आनंद नहीं देगी

प्रेम का कोरा आलाप नहीं यह

वासना में लिपटे शब्दों का राग नहीं

छद्म चिंताओं का दस्तावेज़ नहीं

इसे सुनकर झूमोगे नहीं

यह तुम्हें गुदगुदाएगी नहीं

सीधे चोट करेगी दिमाग पर

तड़प उठोगे

यही उद्देश्य है कविता का

कविता पैदा करती है

जिंदा लोगों में झुरझुरी

एक सिहरन!

सीधे दिल पे चोट करती है.. कविता का तो मतलब ही यही है..जो दिल से लिखी गयी हो..और पढ़ने के लिए भी तो वैसा ही दिल चाहिए.
सशक्त शब्दों का खूबसूरत तानाबाना.. तहे दिल से मुबारकबाद

Comment by बृजेश नीरज on May 1, 2014 at 10:45am

धर्मेन्द्र भाई आपका बहुत-बहुत आभार!

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on May 1, 2014 at 10:38am

अच्छी कविता है बृजेश जी,

निःसंदेह

कविता पैदा करती है

जिंदा लोगों में झुरझुरी

एक सिहरन!

बधाई स्वीकार करें।

Comment by बृजेश नीरज on May 1, 2014 at 10:35am

अरुण भाई आपका बहुत-बहुत आभार! आपके अनुमोदन ने बल दिया!

Comment by Arun Sri on May 1, 2014 at 10:28am

बहुत सुन्दर कविता भईया जी ! समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने वाला कवि कविता का चरित्र चित्रण करेगा तो ऐसा ही करेगा ! सादर !

Comment by बृजेश नीरज on May 1, 2014 at 9:36am

आदरणीय सौरभ जी, मेरी 'कोशिश' को आपका अनुमोदन मेरे लिए तोषदाई है! आपका हार्दिक आभार!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 1, 2014 at 2:32am

इस कविता को पढ़ते हुए रात बारह बजे डीजे के अश्लील शोर पर झूमते, मताये ऐसे लोगों का स्मरण हो आता है, जिनके सामने नागरिक आचार-व्यहार और संहिता की बात करता हुआ कोई सज्जन खड़ा हो. कविता का हेतु स्पष्ट करती एक अच्छी कोशिश के लिए बधाई.

 

Comment by बृजेश नीरज on April 27, 2014 at 9:38pm

आदरणीया महिमा जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on April 27, 2014 at 9:38pm

आदरणीया प्राची जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by MAHIMA SHREE on April 24, 2014 at 9:15pm

आदरणीय ब्रिजेश जी ..बहुत -२ हार्दिक बधाई ...एक साँस में पढ़ गयी  कविता का सच तो यही होना चाहिए जो  समाज में . हर व्यक्ति में उन्नत विचारों का , परिवर्तन का बीज बो दे .. नयी दिशा दे .. सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 2122 अपनी  रानाई  पे  तू  मग़रूर  है  क्या । बेवफ़ाई  के  लिए  मज़बूर  है  क्या ।।कम…See More
1 hour ago
Usha Awasthi posted a blog post

उरिझै कवनेउ मंद

सत्य सुनावै मनई कोउभरि साँसैं जमुहाईंझूठि जहाँ पर चलि रहाहुइ चैतन मुसुकाहिंबहुतै मजा मिलै जहाँचुगली…See More
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Dr.Prachi Singh's blog post उम्र आधी कट गई है, उम्र आधी काट लूँगी
"आदरणीया प्राचीजी उम्र उफ खुद ख्वाहिशों जिन्दगी आदि शब्दों के स्थान पर हिन्दी के शब्द समायोजित हो…"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Dr.Prachi Singh's blog post उम्र आधी कट गई है, उम्र आधी काट लूँगी
"मुहतरमा डॉ० प्राची सिंह जी आदाब, सुन्दर एवं मनोहारी रचना हुई है, बधाई स्वीकार…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr.Prachi Singh's blog post उम्र आधी कट गई है, उम्र आधी काट लूँगी
"आ. प्राची बहन, सादर अभिवादन । अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
6 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , आदाब , हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
18 hours ago
Profile IconJyoti Pandey and Neeta Tayal joined Open Books Online
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh posted a blog post

उम्र आधी कट गई है, उम्र आधी काट लूँगी

रात दिन तुमको पुकारा,किन्तु तुम अब तक न आए !चित्र मेरी कल्पना के,मूर्तियों में ढल न पाए !चिर…See More
23 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' जी, इस लाभकारी जानकारी के लिए आपका हार्दिक…"
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' साहिब , आदाब , हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता साहिब, नमस्कार। जनाब, मुझे आपकी पहली टिप्पणी से लगा आप नाराज़ हो गए हैं। लेकिन…"
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service