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न फिर तुम पूंछना क्यूँ भाई की सूनी कलाई है

१२२२    १२२२    १२२२   १२२२ 

बड़ी उम्मीद से मालिक ने ये दुनिया बनायी है

दरिंदों ने मगर ये आग नफरत की लगाई है

 

कमर दुहरी हुई थी उसकी इक झोपड़ के ही खातिर

मगर हैवान ने वो भी नहीं छोडी जलाई है

 

नपुंसक हो गए हैं आज ताजो तख़्त दुनिया के

यही कहती है सबसे चीख बेबा की रुलाई है

 

कुलांचे भर रहा था जो लहू में है पड़ा भीगा

हिरन शावक पे किसने आज ये गोली चलायी है

 

अगर अब भी रही जारी यूं कन्या भ्रूण हत्याएं

न फिर तुम पूंछना क्यूँ भाई की सूनी कलाई है

 

बहा जिनका पसीना उनको रोटी के पड़े लाले

दलालों ने मगर इस देश में खाई मलाई है

 

  

 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Dr.Prachi Singh on May 2, 2014 at 9:30am

अगर अब भी रही जारी यूं कन्या भ्रूण हत्याएं

न फिर तुम पूंछना क्यूँ भाई की सूनी कलाई है..........बहुत खूब 

सुन्दर ग़ज़ल हुई है ..हार्दिक बधाई आ० अशुतोष जी 

Comment by Satyanarayan Singh on May 1, 2014 at 12:17pm

आ. डॉ आशुतोष जी इस मार्मिक रचना के लिए दिली दाद कबूल करें आदरणीय

अगर अब भी रही जारी यूं कन्या भ्रूण हत्याएं

न फिर तुम पूंछना क्यूँ भाई की सूनी कलाई है

 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 29, 2014 at 12:00am

अगर अब भी रही जारी यूं कन्या भ्रूण हत्याएं

न फिर तुम पूंछना क्यूँ भाई की सूनी कलाई है..........बहुत मार्मिक

बहुत बहुत बधाई आदरणीय डा. आशुतोष जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 28, 2014 at 3:38pm

आदरणीया सरिता जी ..मेरी रचना पर आपकी उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद  .सादर 

Comment by Sarita Bhatia on April 28, 2014 at 9:09am

अगर अब भी रही जारी यूं कन्या भ्रूण हत्याएं

न फिर तुम पूंछना क्यूँ भाई की सूनी कलाई है

 

बहा जिनका पसीना उनको रोटी के पड़े लाले

दलालों ने मगर इस देश में खाई मलाई है

 वाह आदरणीय खुब्सुअरत गजल 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 26, 2014 at 1:24pm

आदरणीया कुंतीजी ..आपसे सतत ही हौसला मिलता रहा है ..बस यूं ही आप का स्नेह मिलता रहे ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 26, 2014 at 1:22pm

आदरणीय मुकेश जी ..मेरी रचना पर आपकी प्रोत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद ..सादर 

Comment by coontee mukerji on April 25, 2014 at 3:58pm

बहुत ही मार्मिक रचना है. शुभकामनाएँ.

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on April 25, 2014 at 12:25pm

आदरणीय आशुतोष जी

बहुत बढ़िया.. बहुत मुबारकबाद

बहा जिनका पसीना उनको रोटी के पड़े लाले

दलालों ने मगर इस देश में खाई मलाई है

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