For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल ‘ कल तलक था बुलंदियो पर वो ‘ --- 'चिराग'

2122 1212 22

 

कौन जीता है कौन हारा है

मौत ने कर दिया इशारा है

 

कल तलक था बुलंदियो पर वो

आज क़िस्मत ने उसको मारा है

 

मेरी हिम्मत न टूटने देना

मेरे मौला तेरा सहारा है

 

माँग लो जो भी माँगना तुमको

सामने टूटता वो तारा है

 

बेवफ़ाई से हो गया पागल

प्यार को कब मिला किनारा है

 

छोड़ दो मारते उसे क्यों हो

मुफ़लिसी, वक़्त का वो मारा है

 

खा के देखूं तो शादी का लड्डू

सोचता बस यही कुँवारा है

 

लूला, लंगड़ा भले अपाहिज हो

माँ को बेटा सदा दुलारा है

 

रौशनी कम हुई 'चिराग' की अब

धुंधला-धुंधला सा बस नज़ारा है

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 564

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on May 15, 2014 at 1:04pm

शुक्रिया सत्य नारायण जी

Comment by Satyanarayan Singh on May 9, 2014 at 4:23pm
इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारे आदरणीय मुकेश जी
Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on May 3, 2014 at 6:35pm

आदरणीय जितेंद्र जी
शुक्रिया आपका

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 1, 2014 at 12:12am

बहुत खुबसूरत गजल कही आपने आदरणीय मुकेश जी

माँग लो जो भी माँगना तुमको

सामने टूटता वो तारा है..................बहुत सुंदर ख्याल. दिली बधाई आपको

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on April 30, 2014 at 10:26pm

आदरणीय सिज़्जु जी
हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 30, 2014 at 10:17am

//कल तलक था बुलंदियो पर वो

आज क़िस्मत ने उसको मारा है//  

आदरणीय मुकेश भाई बहुत खूब वाह दिली दाद कुबूल करें

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on April 30, 2014 at 8:33am

आदरणीया राजेश कुमारी जी
हौसला अफज़ाई के लिए शुक्रिया आपका


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 29, 2014 at 8:04pm

खा के देखूं तो शादी का लड्डू

सोचता बस यही कुँवारा है------जरूर खाओ सोचना क्या ...वाह्ह 

 

लूला, लंगड़ा भले अपाहिज हो

माँ को बेटा सदा दुलारा है-----जबरदस्त भाव ...एक दम सच 

बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई चिराग जी सभी शेर सुन्दर बने हैं ...दिली दाद कबूलिये .

 

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on April 29, 2014 at 4:23pm

आदरणीय रमेश जी
शुक्रिया आपका

Comment by रमेश कुमार चौहान on April 29, 2014 at 2:58pm

रौशनी कम हुई 'चिराग' की अब

धुंधला-धुंधला सा बस नज़ारा है-------------बढि़या
सफल प्रयास के बधाई आदरणीय मुकेशजी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
7 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
21 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service