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मेरी अगर माँ ना होती

मेरी अगर माँ ना होती
मैं कहाँ से होता,
किसकी अंगुली पकड़ के चलता
किसका नाम लेकर रोता.

चलना फिरना हँसना गाना
तेरी भांति माँ मुस्काना
प्रेम के एक एक आखर
पग पग संस्कार सिखलाना
गोदी में सिर रखकर आखिर
निर्भीक कहाँ मैं सोता .

दुनियांदारी के कथ्य अकथ्य
जीवन यात्रा के सत्य असत्य
रंगमंच के सारे पक्ष
कुछ प्रत्यक्ष, कुछ नेपथ्य
राजा रानी  के किस्सों संग
मन माला में कौन पिरोता..

ये जो वायु, आती जाती है
बल, रूप, यौवन सजाती है
दुनियां भर के सारे सुख
नित्य नवीन दिखलाती है
ये तो ऋण तुम्हारा है माँ
बस रहता हूँ मैं ढोता.

मेरी अगर माँ ना होती
मैं कहाँ से होता.

... नीरज कुमार नीर 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:14pm

आ. भाई अरुण जी आपका बहुत बहुत आभार ... 

Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:13pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी आपको रचना पसंद आयी, मुझे अतीव प्रसन्नता हुई .. 

Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:12pm

आ. भाई जीतेंद्र गीत जी आपका बहुत धन्यवाद ..

Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:12pm

आदरणीया मीना पाठक जी बहुत आभार आपका .

Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:11pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब आपका आभार व्यक्त करता हूँ .. 

Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:10pm

आदरणीय शिज्जू शकूर साहब.. रचना आपको पसंद आयी , आपका बहुत शुक्रगुजार हूँ.

Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:10pm

आदरणीया महिमाश्री जी आपका बहुत धन्यवाद ..

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 12, 2014 at 3:31pm

माँ को समर्पित बहुत मधुर भावपूर्ण रचना नीरज भाई दिल से बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 12, 2014 at 9:16am

माँ को समर्पित बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति. बधाई आपको.  

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 12, 2014 at 9:02am

माँ को समर्पित बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना, बधाई स्वीकारें आदरणीय नीरज जी

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