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तुम मेरी सम्पूर्णता की बानगी हो (ग़ज़ल 'राज')

2122  2122   2122 

तुम ग़ज़ल मेरी मुहब्बत में पगी हो

फूल, कलियाँ,वल्लरी सी ताज़गी हो

 

तुमको पाकर ये मकाँ घर हो गया है

तुम मेरी सम्पूर्णता की बानगी हो

 

इन तेरी साँसों से महके प्रेम उपवन

रूप यौवन में बसी इक सादगी हो

 

पास आकर भी नहीं तुम पास मेरे

दूरियों से क्यूँ न फिर नाराज़गी हो

 

बिन तेरे ये दिल धड़कना छोड़ देता   

आज कहता हूँ मेरी तुम जिंदगी हो

 

प्यार पाकर दिल नहीं भरता ये मेरा

झील होकर अनबुझी इक तिश्नगी हो

 

दिल बिछा दूँ मैं जहाँ तू पाँव रख दे

इससे बढ़कर क्या मेरी दीवानगी हो

 

 (मौलिक एवं अप्रकाशित)

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 29, 2014 at 9:15pm

आ० गणेश जी, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना से ग़ज़ल धन्य हुई,ह्रदय तल से बहुत- बहुत आभारी हूँ |  


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 29, 2014 at 7:48pm

आदरणीया राजेश जी, प्रेम में पगी यह ग़ज़ल आकर्षित करती है, सभी शेर अच्छे लगें,अंतिम शेर पर अतिरिक्त दाद देता हूँ, बधाई इस अभिव्यक्ति पर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 26, 2014 at 8:19pm

आ० विजय निकोर जी आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से आभारी हूँ |

Comment by vijay nikore on June 26, 2014 at 12:52pm

खूबसूरत गज़ल के लिए बधाई, आदरणीया राजेश जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 15, 2014 at 6:08pm

आ० माहेश्वरी जी, आप जैसी संवेदन शील रचनाकार से सराहना पाकर ये ग़ज़ल धन्य हुई दिल की गहराई से आपका शुक्रिया| 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 15, 2014 at 6:07pm

प्रिय महिमा श्री जी, आपको बहुत दिनों बाद ओबिओ पर देखा ,बहुत ख़ुशी देख कर उससे ज्यादा ख़ुशी हुई कि तुमने मेरी ये ग़ज़ल पढ़ी और सराही बहुत- बहुत हार्दिक शुक्रिया आपका. 

Comment by Maheshwari Kaneri on June 15, 2014 at 5:54pm

वाह बेहद खुबसूरत ग़ज़ल ..राजेश जी हार्दिक बधाई आपको 

Comment by MAHIMA SHREE on June 14, 2014 at 9:54am

वाह बेहद खुबसूरत ग़ज़ल ..आदरणीया राजेश दी हार्दिक बधाई आपको सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 1, 2014 at 10:32pm

आ० कल्पना दी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ ,इस होंसलाफ्जाई के लिए दिल से शुक्रिया| 

Comment by कल्पना रामानी on June 1, 2014 at 8:46pm

बहत बढ़िया गजल! प्रिय राजेश, हार्दिक बधाई

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